राष्ट्रीय
31-Mar-2026
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-इन जहाजों में मौजूद हैं 485 भारतीय नाविक नई दिल्ली,(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ता दिख रहा है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भारत आने वाले कुल 28 तेल और गैस टैंकर फंसे हुए हैं। इनमें 10 विदेशी झंडे वाले और 18 भारतीय झंडे वाले जहाज शामिल हैं, जो कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी लेकर भारत की ओर आ रहे थे। पोर्ट्स, शिपिंग और वॉटरवेज मंत्रालय में विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि विदेशी जहाजों में तीन एलपीजी, चार क्रूड ऑयल और तीन एलएनजी टैंकर शामिल हैं। वहीं भारतीय झंडे वाले जहाजों में एलपीजी, एलएनजी और कच्चा तेल ले जा रहे कई टैंकर होर्मुज के पास रुके हुए हैं। इन जहाजों पर कुल 485 भारतीय नाविक सवार हैं। बताया गया कि ये जहाज उन करीब 500 जहाजों का हिस्सा हैं, जो इस रणनीतिक जलमार्ग में फंसे हुए हैं। सरकार की पहली प्राथमिकता भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में अब तक 8 भारतीय जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। निकाले गए जहाजों में दो प्रमुख एलपीजी टैंकर बीडब्ल्यू टीवायआर और बीडब्ल्यू ईएलएम शामिल हैं, जिनमें कुल 94,000 टन एलपीजी लदा है। इनमें से एक आज और दूसरा 1 अप्रैल तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। इससे पहले भी कुछ जहाज सुरक्षित पहुंच चुके हैं, जिनमें पाइन गैस और जग वसंत 92,612 टन एलपीजी लेकर 26 मार्च को भारत पहुंचे थे। इसके अलावा एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी 16 और 17 मार्च को क्रमशः मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुंचे थे। एक अन्य जहाज ‘जग लाडकी’ 80,886 टन कच्चा तेल लेकर यूएई से 18 मार्च को मुंद्रा पोर्ट पहुंचा था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना भी निगरानी में जुटी हुई है और अब तक 6 जहाजों को सुरक्षित भारत लाने में मदद की है। अधिकारियों के अनुसार, केवल होर्मुज जलडमरूमध्य ही नहीं, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्र भी हाई-रिस्क जोन बने हुए हैं। हिदायत/ईएमएस 31मार्च26