डॉ. छाया सिंह एवं शशिकला सेन के काव्य पटल का लोकार्पण जबलपुर, (ईएमएस)। साहित्य मानव मन की चेतना से जुड़ा है।सामाजिक समरसता और एकता में साहित्य का अप्रतिम योगदान है। समाज में वर्ग भेद को दूर कर सच्ची एकता साहित्य ही लाता है। हमारे सामने पौराणिक उदाहरण है महर्षि वेदव्यास एवं महर्षि वाल्मीकि के साहित्य के रूप में हैं,जो कालजई कवि हो गए हैं। आज भी सच्चे लेखन को समाज सहज ही स्वीकार करता है।तदाशय के उद्गार वर्तिका संस्था द्वारा डॉ.छाया सिंह एवं शशिकला सेन के काव्य पटल लोकार्पण एवं मासिक काव्य गोष्ठी में अतिथियों ने व्यक्त किए कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री विवेक गुप्ता थे। अध्यक्षता श्रीमती प्रभा श्रीवास्तव बच्चन ने की। विशिष्ट अतिथि संतोष दुबे थे ।इस अवसर पर डॉ.विजय तिवारी किसलय, डॉ.आशा श्रीवास्तव, आशुतोष तिवारी,देव दर्शन सिंह, राजीव गुप्ता को वर्तिका विशिष्ट सम्मान से अलंकृत किया गया। संयोजक विजय नेमा अनुज ने संस्थागत कार्यक्रमों की जानकारी एवं राजेश पाठक प्रवीण ने अपने मुख्य वक्तव्य में वर्तमान परिपेक्ष में साहित्य की भूमिका पर प्रकाश डाला। सरस्वती वंदना श्रीमती अर्चना द्विवेदी ने की। संचालन संतोष नेमा, एवं आभार डॉ. मुकुल तिवारी द्वारा दया गया। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में काव्य गोष्ठी संपन्न हुई जिसमें सुशील श्रीवास्तव अमर सिंह वर्मा,अभय तिवारी,सुभाष जैन शलभ,श्रीमती छाया त्रिवेदी,ज्योत्सना शर्मा,प्रीति नामदेव, नीता सिंह, प्रभा खरे, प्रेम कुमार पालीवाल,कौशिक सेन गुप्ता,मनोज शुक्ला,आई.पी. गोस्वामी, के.पी. पांडे, कुंजीलाल चक्रवर्ती, आकाश सिंह, विनीता विधि,डॉ.अनिल कोरी, कालिदास ताम्रकार,ज्योति मिश्रा,मनोज जैन,लखनलाल रजक,सुनील तोमर, आदि ने प्रेम,करुणा, समर्पण,प्रकृति, संस्कृति पर आधारित एक से बढ़कर एक रचनाओं से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में बच्चन श्रीवास्तव, संजय पांडे,मंजू इंगले, दिवाकर शर्मा,शेखर शर्मा,रमाकांत गौतम, हर्ष तिवारी, रचना गुप्ता,प्रमोद शर्मा,ज्ञानेश्वर द्विवेदी,एवं जी.पी. पटेल आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही.! सुनील साहू / मोनिका / 31 मार्च 2026/ 2.30