अंतर्राष्ट्रीय
01-Apr-2026
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तेहरान (ईएमएस)। हाल ही में ईरान ने अपने रणनीतिक द्वीपों पर सेना और नेवी को मुस्तैद किया है, खासकर खार्ग आइलैंड, केशम, अबू मूसा, ग्रेटर और लेसर तनाब पर तैनाती बढ़ा दी गई है। यह कदम अमेरिका और इजराइल के संभावित आक्रामक कदमों के जवाब में उठाया गया है। ईरान का खार्ग आइलैंड विशेष महत्व रखता है क्योंकि यहां से देश का करीब 90 प्रतिशत तेल एक्सपोर्ट होता है औ ईरान की अर्थव्यवस्था की धड़कन है। यदि यह द्वीप असुरक्षित हो जाए या हमला हो, तब ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में इंटरव्यू में कहा था कि वे ईरान का तेल और उसकी जमीन अपने कब्जे में लेना चाहते हैं। उन्होंने इस अभियान को वेनेजुएला में तेल इंडस्ट्री के नियंत्रण से जोड़ा। इस बयान के बाद ईरान ने अपनी सेनाओं को पूरी सतर्कता के साथ तैनात किया है। ईरानी फौजियों और नेवी के जवान लाल-हरी पट्टियां बांधे हुए अपने द्वीपों की सुरक्षा के लिए तैयार हैं और उनका इरादा स्पष्ट है कि कोई भी दुश्मन उनके द्वीपों पर कदम रखे, तब खात्मा किया जाए। इस वर्ष 7 मार्च को अमेरिकी और इजराइली एयर स्ट्राइक ने केशम द्वीप के डिसलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया, जिससे करीब 30 गांवों की पानी की आपूर्ति ठप हो गई थी। इसके जवाब में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला कर उन्हें नष्ट कर दिया। ईरान की यह तैयारी केवल सैन्य कदम नहीं बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय गौरव के लिए है। खार्ग आइलैंड और अन्य द्वीप केवल भूभाग नहीं हैं, बल्कि ईरान की तेल निर्यात प्रणाली और राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा हैं। सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों में आम ईरानी नौजवान भी अपने द्वीपों की रक्षा के लिए तैयार नजर आए हैं। इस प्रकार ईरान ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उसके द्वीपों पर किसी भी विदेशी ताकत का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उसकी सेना पूरी तरह तैयार है, चाहे जमीन पर हमला हो या समुद्री रणनीति है। आशीष/ईएमएस 01 अप्रैल 2026