नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्र सरकार ने व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे प्रमुख मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए प्रस्तावित सिम बाइंडिंग नियम को लागू करने की समय-सीमा में विस्तार करने का निर्णय लिया है। पूर्व में इस नियम को फरवरी 2026 के अंत तक प्रभावी किया जाना था, लेकिन तकनीकी जटिलताओं और संबंधित कंपनियों द्वारा अतिरिक्त समय की मांग को देखते हुए दूरसंचार विभाग अब इसकी नई समय-सीमा दिसंबर 2026 के अंत तक तय कर सकता है। सिम बाइंडिंग नियम को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी और कड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अंतर्गत मैसेजिंग ऐप्स को उपयोगकर्ता के अकाउंट को उनके मोबाइल फोन में भौतिक रूप से मौजूद सक्रिय सिम कार्ड से जोड़ना अनिवार्य होगा। सरल शब्दों में, उपयोगकर्ता का मैसेजिंग अकाउंट केवल तभी कार्य करेगा जब पंजीकृत सिम कार्ड उसी डिवाइस में लगा हो। यदि सिम कार्ड हटाया जाता है, बदला जाता है या निष्क्रिय हो जाता है, तो संबंधित ऐप का संचालन बाधित हो सकता है। इस नियम का असर डेस्कटॉप और वेब वर्जन पर भी पड़ेगा, जहां सुरक्षा के लिहाज से हर कुछ घंटों में ऑटोमैटिक लॉगआउट और पुनः प्रमाणीकरण जैसी प्रक्रियाएं अनिवार्य हो सकती हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस नियम के जरिए बढ़ते साइबर फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट जैसे स्कैम और विदेशों से संचालित होने वाले फर्जी अकाउंट्स पर प्रभावी लगाम लगाना है। वर्तमान में सिम कार्ड के बिना भी वाई-फाई या अन्य माध्यमों से मैसेजिंग ऐप्स का दुरुपयोग करना आसान है, जिसे यह नियम पूरी तरह बदल देगा। मेटा के स्वामित्व वाले व्हाट्सएप ने पहले ही एंड्रॉइड बीटा वर्जन पर इसकी टेस्टिंग शुरू कर दी है, जबकि स्वदेशी ऐप अरत्तई ने भी सरकार के साथ मिलकर तकनीकी समाधान तलाशने की पुष्टि की है। प्रारंभिक चरण में सरकार इस नियम को एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म पर लागू करने की योजना बना रही है, जिसके बाद इसे आईओएस के लिए अनिवार्य किया जाएगा। हालांकि इस प्रक्रिया से उपयोगकर्ताओं को शुरुआत में कुछ तकनीकी असुविधाएं हो सकती हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश की डिजिटल संप्रभुता और आम नागरिकों को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित होगा। केंद्र सरकार सभी हितधारकों के साथ चर्चा के बाद ही अंतिम दिशा-निर्देश जारी करेगी। वीरेंद्र/ईएमएस/01अप्रैल 2026