जगदलपुर (ईएमएस) । आत्मसमर्पण के बाद इन युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दी जा रही है, जिसमें उन्हें संवाद कौशल और सूचना तंत्र के संचालन के गुर सिखाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण पूरी होने के बाद, गृह विभाग की ओर से प्रत्येक को एक वेलकम किट प्रदान की जा रही है। इस विशेष अभियान के तहत गृह विभाग ने तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को न केवल मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है, बल्कि उन्हें एक डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया है। विभाग के पास अब एक ऐसा रिकॉर्ड मौजूद है, जिसमें इन सभी पूर्व नक्सलियों के नाम, गांव और मोबाइल नंबर दर्ज हैं। एक क्लिक करते ही यह पता चल जाता है कि कौन सा व्यक्ति किस क्षेत्र में सक्रिय है। अब गांव के भीतर होने वाली किसी भी संदिग्ध हलचल या नक्सलियों की मौजूदगी की खबर मिनटों में जिला मुख्यालय और सुरक्षा कैंपों तक पहुंच रही है। गृह विभाग की इस पहल का एक बड़ा मनोवैज्ञानिक असर भी देखने को मिल रहा है। जब ग्रामीण अपने ही बीच के किसी युवक को सरकार की मदद करते और बेहतर जीवन जीते देखते हैं, तो उनका डर कम होता है। यह नेटवर्क न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में भी सेतु का काम करेगा। सुधीर जैन/चंद्राकर/1 अप्रैल 2026