बिलासपुर (ईएमएस)। कहते हैं कि कुछ फैसले इंसान को मौत के बाद भी जिंदा रखते हैं। बिलासपुर के 60 वर्षीय सुशील सगदेव ने ऐसा ही एक निर्णय लेकर समाज के सामने मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही देहदान का संकल्प लिया था, और निधन के बाद उनके परिजनों ने उनकी इस अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए पार्थिव शरीर सिम्स मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया। बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे सुशील सगदेव ने अपने निवास पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से न्यूरोपैथी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और घर पर ही ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। यह होम डेथ का मामला रहा, उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं कराया गया था। सुशील सगदेव मूल रूप से नागपुर के निवासी थे, लेकिन पिछले कुछ समय से बिलासपुर में रह रहे थे। जीवन के अंतिम पड़ाव में लिया गया उनका देहदान का निर्णय अब मेडिकल छात्रों के लिए एक अमूल्य सीख बन गया है। डॉक्टरों के लिए ‘किताब’ बनता है मानव शरीर चिकित्सा शिक्षा में देहदान का विशेष महत्व होता है। मेडिकल छात्र इन्हीं पार्थिव शरीरों (कैडैवर) के माध्यम से मानव शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को समझते हैं। एक तरह से यह शरीर उनके लिए किसी किताब से कम नहीं होता। अक्सर समाज में अच्छे डॉक्टर की अपेक्षा की जाती है, लेकिन यह कम ही सोचा जाता है कि उन्हें सीखने के लिए ऐसे ‘जीवंत उदाहरण’ भी चाहिए होते हैं। कई बार अज्ञानता या परंपराओं के कारण हम इस अमूल्य अवसर को खो देते हैं। समाज के लिए प्रेरणा बनी मिसाल सुशील सगदेव का यह कदम न सिर्फ मानवीय संवेदनाओं को दर्शाता है, बल्कि समाज को यह भी संदेश देता है कि मृत्यु के बाद भी हम दूसरों के काम आ सकते हैं। उनका देहदान आने वाले समय में कई मेडिकल छात्रों को बेहतर डॉक्टर बनने की दिशा देगा, जो आगे चलकर अनगिनत जिंदगियां बचाएंगे। सुशील सगदेव भले ही इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनका यह निर्णय उन्हें हमेशा समाज में जीवित रखेगा। मनोज राज 01 अप्रैल 2026