- 60 फीसदी के डिफाल्टर होने की आशंका - भारतीय किसान संघ का सरकार पर भेदभाव का आरोप; मांगें पूरी न होने पर मालवा प्रांत में जेल भरो आंदोलन का बिगुल फूंका :: इंदौर (ईएमएस)। एक तरफ सरकार प्रदेश में कृषि वर्ष मनाकर किसानों की आय दोगुनी करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक विसंगतियों ने अन्नदाताओं को कर्ज के जाल में उलझा दिया है। भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत ने इंदौर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पटेल एवं प्रचार प्रमुख गोवर्धन पाटीदार ने कहा कि सरकार की नीतियां किसान विरोधी हैं, जिसके कारण प्रदेश का किसान आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर है। नेताओं ने बताया कि सरकार ने गेहूं खरीदी की तारीख तो बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दी है, लेकिन सेवा सहकारी संस्थाओं में शून्य ब्याज पर ऋण जमा करने की अंतिम तिथि 28 मार्च के बाद नहीं बढ़ाई गई। इस विसंगति का नतीजा यह हुआ कि किसान फसल बेचने से पहले कर्ज जमा नहीं कर पाए। अब उन पर 7 प्रतिशत ब्याज और 14 प्रतिशत तक का आर्थिक दंड लगाया जा रहा है। संघ का दावा है कि इस कारण करीब 60 फीसदी किसान डिफाल्टर घोषित हो जाएंगे। पिछले वर्ष के डिफाल्टर किसानों का ब्याज वापस करने का सरकारी वादा भी अब तक हवा-हवाई ही साबित हुआ है। :: नरवाई पर एफआईआर को बताया दमनकारी व्यवहार :: खेतों में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने को लेकर किसानों पर की जा रही कानूनी कार्रवाई पर संघ ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। हाल ही में देवास जिले में 10 किसानों पर हुई कार्रवाई का हवाला देते हुए पदाधिकारियों ने कहा कि अन्नदाताओं के साथ देशद्रोहियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। संघ की मांग है कि जब तक शासन नरवाई के वैज्ञानिक और स्थाई निष्पादन का कोई ठोस विकल्प उपलब्ध नहीं कराता, तब तक किसानों पर एफआईआर और अर्थदंड की दमनकारी कार्यवाही तुरंत रोकी जाए। :: उपज खरीदी की सीमा पर भी घेरा :: प्रेस वार्ता में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा कि मध्यप्रदेश में गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है, लेकिन सरकार बारदानों की कमी का बहाना बनाकर खरीदी की मात्रा प्रति बीघा कम करने का षडयंत्र रच रही है। किसान संघ ने मांग की है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी अनिवार्य रूप से 11 क्विंटल प्रति बीघा के हिसाब से की जाए। साथ ही, ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी के लिए पंजीयन की प्रक्रिया अविलंब शुरू की जाए ताकि किसानों को आगामी फसल की तैयारी में मदद मिल सके। :: जेल जाने को तैयार हैं कार्यकर्ता :: किसान संघ ने चेतावनी के स्वर में कहा कि यदि इन मांगों पर तत्काल विचार नहीं किया गया और किसानों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ, तो संगठन पूरे मालवा प्रांत में उग्र आंदोलन छेड़ेगा। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर किसानों को जेल भेजा गया, तो किसान संघ के कार्यकर्ता सबसे पहले अपनी गिरफ्तारी देकर जेल भरो आंदोलन की शुरुआत करेंगे। इस अवसर पर संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी और बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे। प्रकाश/01 अप्रैल 2026