02-Apr-2026
...


नई दिल्ली (ईएमएस)। लगातार कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फोन स्क्रीन देखने की आदत हमारी आंखों के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। शुरुआत में यह परेशानी हल्की थकान या जलन के रूप में नजर आती है, लेकिन समय के साथ यह बड़ी समस्या का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब हम लंबे समय तक स्क्रीन पर काम करते हैं, तो हमारी पलक झपकाने की दर काफी कम हो जाती है। सामान्य तौर पर इंसान एक मिनट में 15 से 20 बार पलक झपकाता है, लेकिन स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित करने के कारण यह घटकर लगभग 5 बार रह जाती है। इसका सीधा असर आंखों की नमी पर पड़ता है, जिससे ड्राइनेस, जलन और खुजली जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा, खराब रोशनी, स्क्रीन की तेज चमक और धूल भरा वातावरण भी आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं, जिससे कंजंक्टिवाइटिस और कॉर्निया से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि आंखों से जुड़ी समस्याएं धीरे-धीरे विकसित होती हैं, इसलिए शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। आंखों में लालिमा, जलन, सूखापन, धुंधला दिखाई देना, सिरदर्द, तेज रोशनी से चुभन और फोकस करने में परेशानी जैसे लक्षण नजर आएं तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि इनमें से तीन या उससे अधिक लक्षण लगातार महसूस हों, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है। इन समस्याओं से बचाव के लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे प्रभावी तरीका 20-20-20 नियम है, जिसमें हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखना चाहिए। इससे आंखों को आराम मिलता है और तनाव कम होता है। इसके अलावा, काम करते समय बार-बार पलक झपकाना, स्क्रीन को आंखों से उचित दूरी पर रखना और उसकी ऊंचाई सही रखना भी जरूरी है। आंखों की सेहत के लिए संतुलित आहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ए, सी और ई से भरपूर भोजन आंखों को मजबूत बनाने में मदद करता है। हरी सब्जियां, फल और ड्राई फ्रूट्स को डाइट में शामिल करना फायदेमंद होता है। साथ ही, साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए, क्योंकि कई बार समस्याएं बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी विकसित हो जाती हैं। सुदामा/ईएमएस 02 अप्रैल 2026