क्षेत्रीय
02-Apr-2026
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- व्यापारिक प्रतिष्ठान पर फर्म का नाम व जीएसटी नंबर न लिखने पर भी लग सकती है मोटी पेनल्टी - आई टी सी का लाभ लेने के लिए व्यापारी बिलों पर एचएसएन नंबर जरूर लिखते रहें अन्य नियमों पर भी ध्यान दें फिरोजाबाद(ईएमएस)इनकम टैक्स ट्रेड टैक्स बार एसोसिएशन के डायरेक्टर कुलदीप मित्तल एडवोकेट ने सभी व्यापारी भाईयों को आगामी वित्तीय वर्ष 26–27 की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कुछ नियमों के अनुपालन करके अर्थदंड से बचने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि सभी व्यापारी आज 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले नए साल में अनिवार्य रूप से नई बिल बुक शुरू करके एक नए यूनिक नंबर से इनवॉइस जारी करे जैसे 26–27/0001 से, अन्यथा पच्चीस हजार रुपए की पेनल्टी लग सकती है। इसी तरह व्यापार स्थल पर फर्म का नाम व जीएसटी पंजीयन नंबर न लिखने पर मोटी पेनल्टी लगाई जा सकती है। बी टू बी विक्री करते समय बिल पर एच एस एन कोड लिखना अनिवार्य है। न लिखने पर आई टी सी रिजेक्ट हो सकती है, माल के आवागमन में परेशानी हो सकती है और सचल दल द्वारा बिल चेक करने पर संव्यवहार संदिग्ध मानकर कार्यवाही हो सकती है, इसलिए जरूर लिखें। सभी टैक्सेबल व्यापारी अपनी खरीद व आई टी सी का मिलान हर माह ऑनलाइन फार्म 2 ए से करते रहें, बिक्रेता व्यापारी को समय से आर 1 रिटर्न दाखिल करने की याद दिलाते रहें, तभी 2 ए के आधार पर ही आईटीसी का लाभ मिल सकेगा। माल के खरीददार द्वारा विक्रेता व्यापारी को छह महीने के भीतर पेमेंट करते रहें अन्यथा आई टी सी रिवर्स हो सकती है। इसी तरह एम एस एम ई में पंजीकृत निर्माता से माल खरीदने पर 15 दिन एवं आपसी एग्रीमेंट होने पर 45 दिन के भीतर पेमेंट करना जरूरी है। सेल/टैक्स इनवॉइस पर जीएसटी पंजीयन में अधिकृत व्यापारी ही हस्ताक्षर करें। वार्षिक टर्नओवर 5 करोड़ रुपए से अधिक होने पर ई इनवॉइस जारी करना अनिवार्य है। वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेश चंद जैन एडवोकेट ने व्यापारियों से अनुरोध किया है कि समय समय पर टैक्स जमा करते रहें, जिससे कि कर की देनदारी कम हो और स्टॉक कम होता रहे। रिवर्स चार्ज व्यवस्था के अन्तर्गत अपंजीकृत खरीद, भाड़ा, व्यापार स्थल का किराया, लीगल फीस, एवं अन्य खर्चों पर तुरंत टैक्स जमा करके आई टी सी क्लेम करते रहें अन्यथा भविष्य में दिक्कत हो सकती है। समय समय पर व्यापारी अपने मोबाइल पर मैसेज और ईमेल चेक करते रहें क्योंकि अब सरकारी नोटिस डाक द्वारा नहीं आते हैं। नोटिस की तारीख निकल जाने पर आपको काफी अर्थदंड भुगतना पड़ सकता है। यदि आपकी बिक्री किसी माह में 50 लाख रुपए से ऊपर निकलती है तो उस माह से बिक्री का एक प्रतिशत कर नकद जमा करना अनिवार्य है, अन्यथा नोटिस आ सकता है और पेनल्टी लग सकती है। जीएसटी के प्राविधान काफी दंडात्मक है, किसी भी परिस्थिति में बिल बेचने का कार्य न करें। पकड़े जाने पर फर्म को बोगस घोषित करके पेनल्टी लगाई जा सकती है और सामने वाले की आईटीसी ब्लॉक की जा सकती है। इनकम टैक्स ट्रेड टैक्स बार एसोसिएशन की स्टडी सर्किल संयोजक निखिल मित्तल एडवोकेट ने आयकर के संबंध में जानकारी देते हुए बताया है कि अब पार्टनरशिप फर्मों को लोन पर दी जा रही ब्याज के साथ पार्टनर को दी जा रही ब्याज, सैलरी व कमीशन पर भी टीडीएस के प्रावधान लागू हो गए हैं, टीडीएस काटकर जमा न करने पर पेनल्टी भी लग सकती है। सभी व्यापारी गंभीरतापूर्वक नियमों का ध्यान रखें, सरकारी कार्यवाही समय पर पूरी करके पेनल्टी से बचते रहे। ईएमएस