विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक फिर बुलाया जाएगा नई दिल्ली (ईएमएस)। संसद का विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक फिर बुलाया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने और संबंधित संशोधन विधेयकों को पारित करना है। मोदी सरकार ने बजट सत्र के समापन के बीच संसद की बैठकों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित न करने का बड़ा फैसला किया है। इसके बजाय, मोदी सरकार ने तय किया है कि सत्र के अंत में घोषणा की जाएगी कि संसद अगले निश्चित तिथि पर फिर से बैठक करेगी। इस विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक और विधायी कदम उठाए जाएंगे। संसद का बजट सत्र इस वर्ष 28 जनवरी को शुरू हुआ था और प्रारंभ में 2 अप्रैल 2026 तक पूरा करने का कार्यक्रम था। हालांकि, मोदी सरकार अब बजट सत्र को कुछ दिनों के लिए बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके पीछे मुख्य कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें सुनिश्चित करना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बारे में एनडीए के घटक दलों और विपक्ष के कुछ क्षेत्रीय दलों के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कर आम सहमति बनाने की पहल की है। विशेष सत्र में पेश होने वाले संविधान संशोधन विधेयक के तहत नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन होगा। यह संशोधन महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। 2023 में पारित हुए विधेयक के लागू होने के लिए परिसीमन प्रक्रिया जरुरी थी। वर्तमान रूपरेखा के अनुसार, लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 की जाएगी, जिसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। मोदी सरकार का उद्देश्य है कि संसद को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित न किया जाए, बल्कि इसे निश्चित तिथि पर फिर से बैठक के लिए बुलाया जाए। सूत्रों के अनुसार, अप्रैल के तीसरे सप्ताह में दो-तीन दिनों के लिए लोकसभा और राज्यसभा की बैठक आयोजित की जा सकती है। इस सत्र के दौरान महिला आरक्षण और संसद में सीटों की वृद्धि से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे, जिससे महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में मजबूती मिलेगी। विशेष सत्र का आयोजन महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी, बल्कि नीति निर्धारण और विधायी प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी। सरकार का यह कदम महिला आरक्षण को जल्द लागू कराने और लोकसभा की सीटों में बदलाव के माध्यम से प्रतिनिधित्व को व्यापक बनाने के लिए उठाया गया है। इस तरह, 16 से 18 अप्रैल तक का यह विशेष सत्र संसद की कार्यवाही में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने और नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करने के लिए निर्णायक साबित होगा। आशीष दुबे / 02 अप्रैल 2026