-रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले- ऊर्जा सुरक्षा के लिए मजबूत नौसेना अनिवार्य विशाखापट्टनम,(ईएमएस)। भारत की समुद्री ताकत को एक बड़ा बल देते हुए स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को शुक्रवार को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। विश्शाखपट्टनम में आयोजित कमीशनिंग समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे देश की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि एक मजबूत और सक्षम नौसेना आज की आवश्यकता है, क्योंकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक समुद्री मार्गों पर निर्भर करती है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को साकार करने में समुद्री शक्ति की अहम भूमिका होगी। आईएनएस तारागिरी ‘प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत विकसित चौथा युद्धपोत है, जिसका निर्माण एमडीएस लिमिटेड मुंबई द्वारा किया गया है। लगभग 6,670 टन वजनी यह युद्धपोत आधुनिक डिजाइन और अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस पोत की संरचना को विशेष रूप से इस तरह तैयार किया गया है कि यह रडार पर कम दिखाई दे, जिससे इसकी ‘स्टील्थ’ क्षमता बढ़ती है। जटिल समुद्री परिस्थितियों में भी इसकी संचालन क्षमता उच्च स्तर की है। यह युद्धपोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है, जिसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईएस) का योगदान रहा है, जिससे देश में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। आईएनएस तारागिरी में संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली (सीओडीओजी) लगी है, जो इसे उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करती है। यह अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस है, जिनमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल हैं। इन सभी को एक आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे किसी भी खतरे का तेजी और सटीकता से जवाब दिया जा सकता है। युद्धक क्षमताओं के अलावा, इस पोत को मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए भी डिजाइन किया गया है, जिससे यह शांति और संकट दोनों परिस्थितियों में उपयोगी साबित होगा। आईएनएस तारागिरी का नौसेना में शामिल होना भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिक सैन्य शक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जो देश के समुद्री हितों की सुरक्षा को और मजबूत करेगा। हिदायत/ईएमएस 03अप्रैल26