* तिलहन और दलहन की फसल को दिया जा रहा बढ़ावा कोरबा (ईएमएस) कोरबा जिलान्तर्गत परंपरा के तौर पर उगाये जाने वाले धान की जगह पर किसान अब अन्य फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत तिलहन और दलहन की फसल को बढ़ावा दिया जा रहा है। धान के स्थान पर अन्य फसल उगाने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के ग्राम दादर के कृषक भी अब तक धान की खेती करते आ रहे थे। मुनाफा कम होता था, कई बार नुकसान भी हुआ। अब कृषक नंदकुमार ने धान की फसल को मूंगफली में परिवर्तित कर दिया है। कृषक नंदकुमार को कृषि विभाग से नि:शुल्क बीज भी मिले हैं। पैदावार भी अच्छी है, किसान काफी खुश है। मूंगफली कम मेहनत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है। खासतौर पर उन खेतों के लिए जहां सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है, वहां के लिए ऐसी फसलें किसी वरदान से कम नहीं हैं। बिना पानी और कम मेहनत के मूंगफली की फसल अच्छा मुनाफा देती है। पैदावार अच्छी हुई तो प्रति एकड़ 20 क्विंटल तक मूंगफली उगाई जा सकती है। प्रति क्विंटल का दाम भी 6000 तक पहुंच जाता है, जो समर्थन मूल्य पर 3100 रुपए प्रति क्विंटल धान की कीमत से कहीं अधिक है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन भारत सरकार द्वारा शुरू की गई योजना है। मुख्य उद्देश्य देश में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। दलहन और तिलहन की पैदावार को बढ़ावा देना इस योजना का प्रमुख मकसद है। छत्तीसगढ़ में इस योजना का लगातार फैलाव किया जा रहा है। कोरबा जिले में इसे डीएमएफ से भी जोड़ा गया है। जिसके तहत किसानों को नि:शुल्क बीज दिए जा रहे हैं। मकसद यही है कि धान की फसल को कम कर इसके अलावा अन्य फसलों की ओर किसानों का मोड़ा जाए। किसानों को अन्य फसल लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। 03 अप्रैल / मित्तल