राष्ट्रीय
03-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, जिनमें से एक प्रमुख प्रकृति पित्त होती है। आयुर्वेद के अनुसार पित्त प्रकृति वाले लोगों के शरीर में गर्मी अधिक रहती है, उन्हें जल्दी पसीना आता है। इतना ही नहीं, वे स्वभाव से तेज भी हो सकते हैं। ऐसे में उनके लिए संतुलित खानपान और सही जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि शरीर में बढ़ी हुई गर्मी को नियंत्रित किया जा सके और समग्र स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। खानपान की बात करें तो पित्त प्रकृति वाले लोगों के लिए हल्के और ठंडक देने वाले अनाज फायदेमंद होते हैं। जौ, चावल और गेहूं जैसे अनाज न केवल पोषण देते हैं, बल्कि शरीर की आंतरिक गर्मी को भी कम करने में मदद करते हैं। वहीं उड़द दाल और कुलथी जैसी दालें, जो शरीर में गर्मी बढ़ा सकती हैं, उनसे दूरी बनाकर रखना बेहतर होता है। फलों का चयन भी इस प्रकृति के लिए काफी मायने रखता है। मीठे और रसदार फल जैसे सेब, नाशपाती, अंजीर, किशमिश और आंवला शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं और पित्त को संतुलित रखते हैं। हालांकि बहुत ज्यादा खट्टे या तीखे फलों से बचना चाहिए, लेकिन सीमित मात्रा में अनार और आंवला का सेवन लाभकारी हो सकता है। सब्जियों में भी ठंडक देने वाले विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। खीरा, करेला, मटर, परवल और शतावरी जैसी सब्जियां शरीर को शांत और ठंडा बनाए रखने में मदद करती हैं। इसके विपरीत बैंगन, प्याज, लहसुन, गाजर और पालक जैसी गर्म तासीर वाली सब्जियों का सेवन कम मात्रा में करना चाहिए, ताकि पित्त न बढ़े। मसालों का चुनाव भी संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। हल्दी, सौंफ, धनिया, केसर और इलायची जैसे हल्के और शीतल मसाले पित्त को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। वहीं अधिक तीखे मसाले जैसे काली मिर्च और हींग का ज्यादा सेवन पित्त को बढ़ा सकता है, इसलिए इनका उपयोग सीमित रखना चाहिए। डेयरी उत्पाद पित्त प्रकृति वालों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माने जाते हैं। दूध, घी और छाछ शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पाचन को भी संतुलित रखते हैं। इसके विपरीत मांसाहार, खासकर जलीय जीवों का सेवन पित्त को बढ़ा सकता है, इसलिए इससे परहेज करना उचित होता है। जीवनशैली में भी कुछ बदलाव जरूरी हैं। पित्त प्रकृति वाले लोगों को तेज धूप से बचना चाहिए और ठंडे, शांत वातावरण में समय बिताना चाहिए। पानी के पास समय बिताना, हल्का संगीत सुनना या घर में जल से जुड़े तत्व जैसे फाउंटेन रखना मानसिक शांति देता है और शरीर की गर्मी को कम करता है। सुदामा/ईएमएस 03 अप्रैल 2026