अंतर्राष्ट्रीय
04-Apr-2026


करांची(ईएमएस)। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों और उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला देश की आर्थिक राजधानी कराची से सामने आया है, जहां एक ऐतिहासिक इमारत में स्थापित भगवान कृष्ण और गोपियों की प्राचीन मूर्तियों को असामाजिक तत्वों द्वारा खंडित कर दिया गया। इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय में गहरा रोष और असुरक्षा की भावना व्याप्त है। हिंदू सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कृत्य की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की भावनाओं पर सीधा हमला करार दिया है। घटना के बारे में जानकारी देते हुए पाकिस्तान दरवार इत्तेहाद के अध्यक्ष शिव कच्छी ने बताया कि यह शर्मनाक घटना दो दिन पहले कराची की ऐतिहासिक सगन मेसन भवन में हुई। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यह केवल पत्थरों के ढांचे को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की बहुसांस्कृतिक विरासत और धार्मिक सद्भाव को चोट पहुँचाने का प्रयास है। इस ऐतिहासिक इमारत का निर्माण स्वतंत्रता-पूर्व काल में वर्ष 1937 में किया गया था और इसमें हिंदू समुदाय की बहुमूल्य मूर्तियां व अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक सुरक्षित रखे हुए थे। पीड़ित समुदाय ने सरकार से मांग की है कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों को बिना किसी विलंब के गिरफ्तार कर कड़ी सजा दी जाए। साथ ही, ऐतिहासिक इमारत के तत्काल जीर्णोद्धार और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की भी मांग उठाई गई है। गौरतलब है कि पाकिस्तान में मंदिरों और हिंदू प्रतीकों पर हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी सिंध और पंजाब प्रांतों में कई बार धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया है। भारत ने भी अंतरराष्ट्रीय मंचों और संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन का मुद्दा बार-बार उठाया है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और धार्मिक सहिष्णुता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/04अप्रैल2026 ---------------------------------