04-Apr-2026
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कोलकाता(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया संपन्न होने के बाद भी शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्वाचन आयोग ने एक अभूतपूर्व फैसला लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव नतीजे आने के बाद भी कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 500 कंपनियां राज्य में तैनात रहेंगी। यह तैनाती आयोग के अगले आदेश तक जारी रहेगी, ताकि मतगणना के बाद संभावित राजनीतिक हिंसा को पूरी तरह से रोका जा सके। प्रत्येक कंपनी में लगभग 80 से 100 जवान शामिल होते हैं, जो राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चुनावी प्रक्रिया को हिंसा, डर और प्रलोभन से मुक्त रखा जाए। पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद होने वाली हिंसा के पिछले इतिहास को देखते हुए आयोग इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई व्यापक हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। उस समय लगभग 1,970 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें हत्या, यौन उत्पीड़न और आगजनी जैसे संगीन मामले शामिल थे। निर्वाचन आयोग ने न केवल सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी कड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने राज्य सरकार द्वारा चुनाव से ठीक पहले 832 सत्ताधारी दल के नेताओं को दी गई विशेष वीआईपी सुरक्षा की समीक्षा करने और सुरक्षाकर्मियों का सभी दलों के बीच समान वितरण करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, सत्ताधारी दल के लिए प्रचार करने के दोषी पाए गए खंडाघोष विधानसभा क्षेत्र के संयुक्त बी़डीओ और सहायक रिटर्निंग ऑफिसर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आयोग उन थोक तबादलों पर भी नजर रख रहा है, जो चुनावी प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले बड़े पैमाने पर किए गए थे। इसी बीच, मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हंगामे के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। घटना के मुख्य साजिशकर्ता मोफक्करुल इस्लाम को सिलीगुड़ी के बागडोगरा हवाई अड्डे से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी वकील है और उसके तार एक राजनीतिक दल से जुड़े होने की बात सामने आई है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि जब तक नई सरकार बनने के बाद स्थितियां पूरी तरह सामान्य नहीं हो जातीं, तब तक केंद्रीय बल राज्य में मुस्तैद रहेंगे। गृह मंत्रालय भी इन बलों की वापसी के लिए आयोग की मंजूरी का इंतजार करेगा। वीरेंद्र/ईएमएस/04अप्रैल2026