राष्ट्रीय
04-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। पीएम मोदी ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला उनकी ही सरकार ने किया है। उन्होंने बताया कि इसी मकसद से बजट सत्र को पूरा करने के बजाय उसका विस्तार किया गया है और संसद 16, 17 और 18 अप्रैल को तीन दिनों के लिए फिर से बैठेगी। इस विशेष सत्र का मकसद महिला आरक्षण से जुड़े कानूनों को लेकर जरूरी प्रक्रिया पूरी करना है, ताकि इसका लाभ तय समय पर मिल सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए कानून बनाया गया है, ताकि साल 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव से इसका लाभ मिलना शुरू हो जाए। उनका कहना था कि 33 प्रतिशत बहनें संसद में पहुंचें और जनप्रतिनिधि बनें, इसके लिए कानूनी प्रावधान जरूरी है। इसी वजह से संसद का विशेष सत्र बुलाया जा रहा है, ताकि महिला आरक्षण से जुड़े कानूनों को आगे बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि केरल, तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों के साथ किसी तरह का अन्याय नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह झूठ फैला रहे हैं कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम करने वाले राज्यों की लोकसभा सीटें कम हो जाएंगी। सरकार चाहती है कि संसद में कानून के जरिए यह सुनिश्चित किया जाए कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा और तेलंगाना समेत किसी भी राज्य की लोकसभा सीटें कम न हों। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के लिए जो सीटें तय की जाएंगी, वे अतिरिक्त सीटें होंगी। उन्होंने कहा कि इससे खासतौर पर दक्षिण भारत के राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा। इसी उद्देश्य से कानून में संशोधन के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार चाहती है कि महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधान पूरी तरह स्पष्ट और मजबूत हों, ताकि किसी भी राज्य को नुकसान न हो। सुबोध/०४-०४-२०२६