04-Apr-2026


देहरादून (ईएमएस)। नेताजी संघर्ष समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रभात डंडरियाल और प्रमुख महासचिव आरिफ वारसी ने हिंदी भाषा की दुर्दशा पर गहरा रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि जहां आप हम अपने बच्चों को अन्य भाषाओं का ज्ञान दिलाने का कार्य करते हैं, वहीं हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि कहीं हम अपनी आने वाली पीढ़ी से उसकी असली भाषा और पहचान को तो नहीं खत्म कर रहे और छीन रहे हैं जो की देखने में आ ही रहा है और ऐसा ही हो रहा है हम अभिभावकों के साथ वह स्कूल भी इसमें अधिक दोषी हैं जो हिंदी बोलने को एक जुर्म की श्रेणी में रखकर हिंदी बोलने वालों पर जुर्माना लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि असल में दोषी कुछ वह स्कूल भी हैं जो सीबीएसई या आईसीएसई हैं जो भारत वासियों को भारत की सही भाषा और संस्कृति से दूर रखने का कार्य कर रहे हैं। वारसी और डंडरियाल ने कहा कि दिनभर बहुत से ऐसे बच्चे मिलते हैं जिन्हें हिंदी के शब्द के साथ-साथ हिंदी की गिनती का भी ज्ञान नहीं है वह कहते हैं 45 को इंग्लिश में क्या कहते हैं 86 को अंकल बताइए इसको इंग्लिश में क्या बोलेंगे इसका जीता जागता एक उदाहरण अभी हाल में देखा गया कि एक अंग्रेजी स्कूल के छात्रों से जब यह पूछा गया की छियालिस किसे कहते हैं तो बच्चे नहीं बता पाए शिक्षक को फिर यह बताना पड़ा कि बच्चों 46 को फोर्टी सिक्स कहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश की भाषा हिंदी और संस्कृति बची रहे इसके लिए सभी अभिभावकों, विभागों के साथ सरकार को जागरूक होना होगा तभी देश की भाषा और संस्कृति को बचाया जा सकता है नहीं तो अन्य भाषाओं का ज्ञान लेने और पैसे कमाने की होड़ में हम अपनी पहचान भूल जाएंगे। वारसी ने कहा कि बड़ा दुख का विषय है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे पर स्कूल में जहां ज्ञान दिया जाता है वहां हिंदी बोलने पर रोक लगाई जाएगी और बच्चों को सिखाया नहीं जाएगा तो बच्चे आगे कैसे सीख पाएंगे शब्दों के साथ बच्चों को हिंदी की गिनती का ज्ञान तक नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदी की गिनती भी बच्चों को सही तरह नहीं आती ये एक गंभीर विषय है बच्चे आज न हिंदी लिखते हैं न बोलते हैं न हिंदी की पत्रिकाएं और समाचार पत्र पढ़ते हैं हमें सबको जागरूक होना होगा कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को अपनी भाषा सीखने की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करें कि वह अपनी मातृभाषा को समझे बोले सीखें। शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/04 अप्रैल 2026