2026 में अब तक 17 प्रतिशत गिरा सेंसेक्स मुंबई(ईएमएस)। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ गया है। देश का प्रमुख इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स अब डॉलर के हिसाब से बेयर मार्केट में पहुंच चुका है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। बीएसई डॉलर 30 के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2024 के रिकॉर्ड स्तर 8,418.89 से गिरकर यह 2 अप्रैल 2026 को 6,482.11 पर आ गया है। यानी करीब 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है। वहीं रुपये के हिसाब से सेसेक्स में 14.58 प्रतिशत की गिरावट आई है। इस दौरान भारत के अलावा सिर्फ फिलीपींस का बाजार ही बेयर फेज में रहा, जहां करीब 25 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। यहां बता दें कि जब शेयर बाजार में लंबे समय तक 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा गिरावट आती है, तो उसे बेयर मार्केट कहा जाता है। यह संकेत देता है कि निवेशकों में भरोसा कम हो रहा है और आर्थिक सुस्ती की आशंका बढ़ रही है। इस गिरावट में रुपये की कमजोरी का भी बड़ा योगदान रहा है। भारतीय रुपया 83.64 प्रति डॉलर से गिरकर 93.11 तक पहुंच गया है, यानी करीब 11.31 प्रतिशत कमजोर हुआ है। इससे विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर असर पड़ा और उन्होंने बाजार से पैसा निकालना शुरू किया। इस अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 47.1 अरब डॉलर (4.17 लाख करोड़) के शेयर बेच दिए। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 12.53 लाख करोड़ का निवेश कर बाजार को कुछ हद तक संभाले रखा। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढऩे से निवेशकों ने जोखिम वाले बाजारों से दूरी बनाई। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर अनिश्चितता और अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी बाजार पर असर डाला है। तेल की कीमतें बढक़र 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ सकता है। इस साल का प्रदर्शन निराशाजनक 2026 में अब तक सेंसेक्स डॉलर के हिसाब से करीब 17 प्रतिशत गिर चुका है, जिससे यह दुनिया के बड़े बाजारों में दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स बन गया है। कुल मिलाकर, विदेशी निवेशकों की निकासी, रुपये की कमजोरी और वैश्विक तनाव ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना दिया है। आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों और निवेशकों के भरोसे पर निर्भर करेगी। अगर दुनिया में अनिश्चिता के और युद्ध के हालात बने रहे तो आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल और महंगा होगा, जिसका सीधा असर गोल्ड और डॉलर पर पड़ेगा। जिसका सीधा नेगेटिव असर इंटरनेशनल मार्केट और भारत के मार्केट पर पड़ेगा। दूसरी और अगर जल्द ही ईरान-अमेरिका और रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म हो जाते हैं तो चीजे बदल सकती हैं। विनोद उपाध्याय / 05 अप्रैल, 2026