:: मुख्यमंत्री डॉ. यादव का संकल्प : दुग्ध उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य :: भोपाल/इंदौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश को दुग्ध उत्पादन और गो-वंश संरक्षण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक महत्वाकांक्षी कार्ययोजना प्रस्तुत की है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक मध्य प्रदेश को देश की मिल्क कैपिटल के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025 लागू कर दी गई है, जिसके तहत नगरीय क्षेत्रों में 5 हजार से अधिक क्षमता वाली वृहद गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश के कुल दुग्ध उत्पादन में मध्य प्रदेश का योगदान लगभग 9 प्रतिशत है, जिसे आगामी वर्षों में 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। इस उद्देश्य की पूर्ति और सांची ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के साथ महत्वपूर्ण करार किया गया है। अगले पांच वर्षों में दुग्ध संकलन क्षमता को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुँचाने और डेयरी सहकारी समितियों का विस्तार 9 हजार से बढ़ाकर 26 हजार गांवों तक करने का खाका तैयार किया गया है। :: गौ-वंश संरक्षण हेतु बजट और अनुदान में भारी वृद्धि :: पशुपालन विभाग का नाम बदलकर अब गौपालन विभाग कर दिया गया है। गो-वंश के बेहतर भरण-पोषण के लिए चारा-भूसा अनुदान की राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रतिदिन प्रति गाय कर दिया गया है। इसके लिए बजट में 505 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। ग्वालियर स्थित आदर्श गौशाला में देश का पहला 100 टन क्षमता वाला सीएनजी प्लांट स्थापित कर अपशिष्ट से ऊर्जा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। इसके साथ ही घायल गायों के लिए हाइड्रोलिक कैटल लिफ्टिंग वाहनों की सुविधा भी सुनिश्चित की जा रही है। :: पशुपालकों को 33 प्रतिशत तक सब्सिडी :: डेयरी क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना’ का नाम अब ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर विकास योजना’ कर दिया गया है। इस योजना के अंतर्गत 25 दुधारू पशुओं की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए 42 लाख रुपये तक के ऋण पर 25 से 33 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जाएगी। ग्रामीण आजीविका को सशक्त करने के उद्देश्य से प्रत्येक ब्लॉक में एक वृंदावन ग्राम विकसित किया जा रहा है, जो आदर्श डेयरी मॉडल के रूप में कार्य करेगा। :: पिछड़ी जनजातियों के लिए विशेष प्रोत्साहन :: अति पिछड़ी जनजातियों (बैगा, सहरिया और भारिया) के उत्थान के लिए 14 जिलों में मुख्यमंत्री दुधारू पशु योजना संचालित है, जिसमें 90 प्रतिशत अनुदान पर दो-दो मुर्रा भैंस या गाय प्रदान की जा रही हैं। वहीं, केंद्र के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 1500 मैत्री केंद्रों के माध्यम से पशु नस्ल सुधार का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन एकीकृत प्रयासों से न केवल दुग्ध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि प्रदेश का प्रत्येक किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनेगा। प्रकाश/5 अप्रैल 2025