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07-Apr-2026
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09 जजों वाली संविधान पीठ ने शुरु की सुनवाई नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट में केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े विवाद पर मंगलवार से 9 जजों की संविधान पीठ ने सुनवाई शुरू कर दी है। यह सुनवाई इस बात पर केंद्रित है कि पूर्व के फैसले की समीक्षा की जाए या केवल उन सात संवैधानिक सवालों के जवाब दिए जाएं, जिन्हें इस मामले में संदर्भित किया गया है। सुनवाई से पहले केंद्र सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अदालतों को धार्मिक परंपराओं में सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए। सरकार के अनुसार, सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक भगवान अयप्पा की ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ परंपरा से जुड़ी है। भगवान अयप्पा को आजीवन ब्रह्मचारी माना जाता है और इसी आधार पर यह परंपरा विकसित हुई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध महिलाओं की शुद्धता या उनकी सामाजिक स्थिति से जुड़ा नहीं है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं और पूजा-पद्धति का हिस्सा है। यदि इस परंपरा में बदलाव किया जाता है, तो इससे मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित होगी और संविधान द्वारा संरक्षित धार्मिक विविधता पर भी असर पड़ सकता है। संविधान पीठ अन्य मुद्दों पर भी कर रही विचार यह मामला केवल सबरीमाला तक सीमित नहीं है। संविधान पीठ धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी विचार कर रही है। इनमें मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश का अधिकार, दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित महिला खतना प्रथा, और अन्य धर्म में विवाह करने वाली पारसी महिलाओं को धार्मिक स्थलों में प्रवेश देने जैसे प्रश्न शामिल हैं। पिछले 26 वर्षों से लंबित है मामला धार्मिक स्थलों पर लैंगिक समानता और परंपराओं के बीच संतुलन का यह विवाद पिछले 26 वर्षों से देश की विभिन्न अदालतों में लंबित है। अब सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक याचिकाओं पर 22 अप्रैल तक अंतिम सुनवाई की जाएगी। जानें सुनवाई की प्रक्रिया सुनवाई की प्रक्रिया के तहत 7 से 9 अप्रैल तक पुनर्विचार याचिकाकर्ता और उनके समर्थक पक्ष अपनी दलीलें पेश करेंगे, जबकि 14 से 16 अप्रैल के बीच विरोधी पक्ष अपनी बात रखेगा। इस महत्वपूर्ण मामले का निर्णय देश में धार्मिक स्वतंत्रता, परंपरा और लैंगिक समानता के संतुलन को नई दिशा दे सकता है। हिदायत/ईएमएस 07अप्रैल26