:: पूर्व कोर्ट आदेशों को खारिज करते बदला उच्च शिक्षा विभाग का आदेश:: इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस जय कुमार पिल्लई की एकलपीठ ने इन्दौर के शासकीय माता जीजाबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय (ओल्ड जीडीसी) के प्रभारी प्राचार्य विवाद को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई उपरांत कोर्ट के पूर्व आदेशों को निरस्त कर राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि नियमित प्राचार्य की नियुक्ति तक डॉ. मंजू शर्मा को प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार सौंपा जाए। कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि प्रशासनिक पदों पर नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर होगी और पदनाम को वरिष्ठता का आधार नहीं माना जा सकता। जून 2025 से शुरू हुए प्रभारी प्राचार्य पद को लेकर इस विवाद की कहानी संक्षेप में इस प्रकार है कि महाविद्यालय में नियमित प्राचार्य के सेवानिवृत्त होने पर डॉ. मंजू शर्मा को दरकिनार करते हुए प्रभारी प्राचार्य का कार्यभार 30 जून 2025 को डॉ. अशोक सचदेवा को सौंपा गया था। जिसके बाद 29 जुलाई 2025 को उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया। इसे डॉ. मंजू शर्मा ने हाइकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी। याचिका सुनवाई दौरान उन्होंने कोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति 12 सितंबर 1983 को सहायक प्राध्यापक (गृह विज्ञान) के रूप में हुई और 8 दिसंबर 2006 को पदोन्नति देकर उन्हें प्रोफेसर बनाया गया। वहीं, डॉ. अशोक सचदेवा की नियुक्ति 15 नवंबर 1983 को हुई और 30 अक्टूबर 1989 को वे नियमित हुए। उन्हें 13 जून 2018 को केवल प्रोफेसर का पदनाम दिया गया पद नहीं। इस पर डॉ. सचदेवा की ओर से तर्क देते कोर्ट को बताया कि यह पदनाम ही वास्तविक पदोन्नति है और यूजीसी नियम 2010 में पदोन्नति, नियुक्ति और पदनाम को समान माना गया है। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत दी गई पिछली तारीख से प्रभावी पदनाम, नियमित पदोन्नति से प्राप्त वरिष्ठता को समाप्त नहीं कर सकता। 2018 का आदेश वास्तविक पदोन्नति नहीं माना जा सकता। यूजीसी नियम केवल वेतन और अकादमिक स्थिति के लिए लागू होते हैं, प्रशासनिक वरिष्ठता के लिए नहीं। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने पूर्व आदेशों को भी खारिज कर दिया। आनंद पुरोहित/ 06 अप्रैल 2026