क्षेत्रीय
06-Apr-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। वैशाख शुक्ल पक्ष की अक्षय तृतीया तिथि पर 19 अप्रैल को भगवान परशुराम जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, जिन्होंने अधर्म और अन्याय के विनाश के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम बल, पराक्रम, तप, शौर्य और धर्म रक्षा के प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में परशुराम जयंती के अवसर पर विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना, हवन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण जैसे आयोजन किए जाएंगे। - अक्षय तृतीया और पर्व का महत्व पंडितों के अनुसार, भगवान परशुराम जयंती हर वर्ष वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है, जिसे अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। यह तिथि हिंदू पंचांग में अत्यंत शुभमानी जाती है। इस दिन किए गए दान, जप, तप, स्नान और पूजा का फल अक्षय अर्थात कभी समाप्त न होने वाला माना जाता है। जयंती का पर्व भक्तों के लिए और इसी कारण इस बार परशुराम भी विशेष बन गया है। - धर्म रक्षा और शौर्य के प्रतीक हैं भगवान परशुराम धार्मिक ग्रंथों में भगवान परशुराम को ऋ षि परंपरा और क्षत्रिय तेज का अद्भुत संगम बताया गया है। वे महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। मान्यता है कि उन्होंने अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध संघर्ष कर धर्म की स्थापना का संदेश दिया। उनका जीवन समाज को यह प्रेरणा देता है कि सत्य, संयम और धर्म की रक्षा के लिए सदैव सजग रहना चाहिए। - युवाओं को भी मिलेगा प्रेरणा का संदेश धर्माचार्यों का कहना है कि भगवान परशुराम का जीवन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि अनुशासन, परिश्रम, त्याग और न्यायप्रियता की प्रेरणा भी देता है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धार्मिक मूल्यों से जोडऩे का अवसर मिलता है। - मनोज राज/06 अप्रैल 2026