अंतर्राष्ट्रीय
06-Apr-2026
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लंदन,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया के होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा पर मंडराते खतरों के बीच ब्रिटेन ने एक बड़ा रक्षात्मक कदम उठाया है। रॉयल नेवी ने अपनी सबसे घातक और विशेषज्ञ ईकाई, डाइविंग एंड थ्रेट एक्सप्लॉइटेशन ग्रुप को हाई अलर्ट पर रखा है। इस विशेष टीम का मुख्य उद्देश्य ईरान द्वारा समुद्र के भीतर बिछाई गई संभावित बारूदी सुरंगों (माइंस) को खोजना और उन्हें निष्क्रिय करना है। इस मिशन को दुनिया के सबसे जोखिम भरे सैन्य ऑपरेशनों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि ये गोताखोर शून्य दृश्यता और गहरे पानी की खतरनाक परिस्थितियों में विस्फोटकों के साथ काम करते हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, कमांडो नाव, पैराशूट या मिनी-सबमरीन के जरिए लक्षित क्षेत्र तक पहुँचने में सक्षम हैं। ये मिनी-सबमरीन लगभग 50 किलोमीटर के दायरे में ऑपरेट कर सकती हैं और अत्याधुनिक एस्ट्यूट क्लास पनडुब्बियों के साथ मिलकर काम करती हैं। इन गोताखोरों को न केवल बम निरोधक कार्यों में महारत हासिल है, बल्कि उन्हें काउंटर-टेरर ऑपरेशनों के लिए स्पेशल बोट सर्विस के साथ तालमेल बिठाने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री माइंस का खतरा वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत गंभीर है। अनुमान है कि ईरान के पास लगभग 5,000 समुद्री माइंस का भंडार है, जो जहाजों के संपर्क में आने, चुंबकीय खिंचाव या ध्वनि संकेतों के माध्यम से विस्फोट कर सकती हैं। इनमें से कुछ माइंस समुद्र तल पर टिकी होती हैं, जो ऊपर से गुजरने वाले जहाज पर रॉकेट की तरह हमला करती हैं, जबकि कुछ सतह के ठीक नीचे तैरती रहती हैं। सबसे घातक वे माइंस हैं जिन्हें बिछाने के कई दिनों बाद सक्रिय किया जाता है, जिससे उनके स्थान का पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है। होर्मुज का यह समुद्री मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है, जहाँ से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुजरती है। वर्तमान संघर्ष के कारण यहाँ सैकड़ों मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा हो गई है। यदि माइंस के कारण यह रास्ता पूरी तरह बंद होता है, तो वैश्विक तेल संकट गहरा सकता है। रॉयल नेवी के अधिकारियों का कहना है कि हालांकि ईरान द्वारा वास्तव में माइंस बिछाए जाने की अभी पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन किसी भी अप्रिय स्थिति और सबसे खराब परिदृश्य से निपटने के लिए पूर्ण तैयारी अनिवार्य है। इस तैनाती का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। वीरेंद्र/ईएमएस/06अप्रैल2026