अंतर्राष्ट्रीय
06-Apr-2026


बीजिंग,(ईएमएस)। ईरान युद्ध के बीच क्या चीन ताइवान से भिड़ने की तैयारी कर रहा है? ये सवाल इसलिए चर्चा में आ गया हैं, क्योंकि अचानक कुछ संदिग्ध चीजें दिखाई दी हैं। चीन ने बिना कोई वजह बताए 40 दिनों के लिए समुद्र के ऊपर के हवाई क्षेत्र के बड़े हिस्से को बंद किया है। रिपोर्ट के मुताबिक यह कदम असामान्य है क्योंकि आमतौर पर इस तरह की चेतावनियां कुछ ही दिनों तक चलने वाले छोटे सैन्य अभ्यासों से जुड़ी होती हैं। सिर्फ इतना ही नहीं ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय (एमएनडी) ने अपने क्षेत्रीय जल के आसपास चीनी सैन्य विमानों की तीन फाइटर जेट्स, छह नौसैनिक जहाजों और दो सरकारी जहाजों के आने की जानकारी दी है। ये तीनों मध्य रेखा को पार करके ताइवान के उत्तरी और पूर्वी क्षेत्र में प्रवेश कर गईं। बीजिंग ने इलाके में किसी भी तरह के युद्धाभ्यास का ऐलान नहीं किया है जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है। ये रिजर्व जोन ताइवान से सैकड़ों मील दूर हैं। आमतौर पर एयर शो या छोटे अभ्यासों के लिए 1-3 दिन का ब्लॉक होता है। 40 दिन का समय किसी बड़े पैमाने पर युद्ध अभ्यास या नई मिसाइल तकनीक के परीक्षण की ओर इशारा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की युद्धक तैयारियों को जांच रहा है। इस ब्लॉक का सीधा संबंध ताइवान स्ट्रेट या दक्षिण चीन सागर में शक्ति प्रदर्शन से हो सकता है। इसमें वायुसेना, नौसेना और मिसाइल फोर्स का संयुक्त अभ्यास शामिल हो सकता है, जिसे सर्फेस-टू-एयर इंटरैक्शन कहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये अलर्ट 27 मार्च से 6 मई तक लागू रहेगा और इन्हें नोटिस टू एयर मिशन्स (नोटम) के तौर पर जारी किया गया है। इनका इस्तेमाल आम तौर पर पायलटों को हवाई क्षेत्र में अस्थायी पाबंदियों या खतरों के बारे में चेतावनी देने के लिए किया जाता है। हालांकि नागरिक उड्डयन में कोई रुकावट नहीं आई है लेकिन विमानों को इन प्रतिबंधित क्षेत्रों से गुजरने के लिए तालमेल बिठाना जरूरी होगा। ईरान युद्ध के बीच चीन के इस कदम पर दुनिया की नजर है। बता दें कि ताइवान पर चीन का दावा जटिल मुद्दा है जिसकी जड़ें ऐतिहासिक, राजनीतिक और कानूनी तर्कों में हैं। बीजिंग का दावा है कि ताइवान चीन का एक अभिन्न अंग है। यह दृष्टिकोण उसकी राष्ट्रीय नीति में शामिल है और घरेलू कानूनों तथा अंतरराष्ट्रीय बयानों द्वारा समर्थित है। हालकि ताइवान अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है और अपनी सरकार, सेना तथा अर्थव्यवस्था के साथ स्वतंत्र रूप से काम करता है। यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के मुताबिक ताइवान की स्थिति अंतरराष्ट्रीय बहस का एक अहम मुद्दा बनी हुई है। चीन ने 2027 तक ताइवान पर कब्जा करने का लक्ष्य रखा गया है। आशीष दुबे / 06 अप्रैल 2026