भारत के आयात बिल पर बोझ बढक़र हो जाएगा 16,000 करोड़ का नई दिल्ली(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी बढऩे से कच्चे तेल की कीमतें आज फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान को नर्क बनाने धमकी देने के बाद ईरान ने ग्लोबल सप्लाई ठप करने की बात कही है। इससे आज एक बैरल ब्रेंट क्रूड की कीमत $1.71 डॉलर की बढक़र 110.74 डॉलर पर पहुंच गई है। मार्केट एक्सपट्र्स का कहना है कि अगर यह तनाव इसी तरह जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकती हैं। इसके अलावा, अगर कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर की बढ़ोतरी सालभर बनी रहती है, तो भारत का सालाना आयात बिल करीब 16,000 करोड़ बढ़ जाएगा। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए यह स्थिति चिंताजनक है। ईरान ने होर्मुज रूट को लगभग बंद कर दिया है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से न सिर्फ कच्चा तेल, बल्कि एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक की कीमतों में भी भारी तेजी आने लगी है। कोटक सिक्योरिटीज और नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज जैसे बड़े ब्रोकरेज हाउस ने चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहता है, तो कच्चे तेल का भाव 110 डॉलर से 150 डॉलर के बीच रह सकता है। वहीं, ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी के अनुसार, अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने पर भी कीमतें $85-$90 डॉलर के नीचे नहीं आएंगी। कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल और सीएनजी-पीएनजी की कीमतें बढ़ेंगी। इससे ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ती है, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो सकती है, जिससे इम्पोर्ट महंगा होगा और विदेशी सामान खरीदना महंगा पड़ेगा। साथ ही विदेश में घूमने और पढऩे के लिए भी ज्यादा कीमत देनी होगी। तेल की कीमतें 10 डॉलर बढऩे से 0.60 प्रतिशत बढ़ेगी महंगाई रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60 प्रतिशत) तक बढ़ सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, ऐसे में वहां के हालात बिगडऩे से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट, जीडीपी ग्रोथ और रुपए की वैल्यू पर भी दबाव बढ़ेगा। ट्रम्प ने ईरान को बास्टर्ड कहते हुए होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलने पर बड़ा हमला करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज नहीं खोला तो वो उसे नरक बना देंगे। इसके साथ ही उन्होंने ईरान में पावर प्लांट और पुलों पर हमला करने की बात कही। ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान में मंगलवार को पावर प्लांट डे और ब्रिज डे एक साथ होगा यानी हमला होगा। ईरान होर्मुज स्ट्रेट खोले दे, नहीं तो नरक जैसे हालात में पहुंच जाएगा। ईरान का पलटवार: पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में जल जाएगा ट्रम्प के बयान के बाद ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले बढ़े तो वह ग्लोबल सप्लाई चेन को ठप कर देगा। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज के अलावा दूसरे समुद्री रास्तों को भी निशाना बना सकता है। ईरानी सुप्रीम लीडर के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कहा कि किसी भी बड़ी कार्रवाई का जवाब सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा और व्यापार पर असर डालकर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही नहीं, बल्कि बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्ते भी खतरे में आ सकते हैं। विनोद उपाध्याय / 06 अप्रैल, 2026