राष्ट्रीय
07-Apr-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाकर उन्हें हटाए जाने के विपक्षी प्रस्ताव को राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने खारिज कर दिया। इस पर त्वरित प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राज्यसभा में कांग्रेस संसदीय दल के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने कहा, सभापति ने ये फैसला उस दबाव के तहत लिया जिसमें उन्हें पता है कि पूर्व में जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद तत्कालीन सभापति का क्या हश्र हुआ था ! राज्यसभा द्वारा जारी संसदीय बुलेटिन2 के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए लाया गया प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। यह निर्णय राज्यसभा के सभापति द्वारा विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया। निर्णय लेने में सभापति ने संवैधानिक रूप से प्रदत्त खास शक्तियों का उपयोग किया। उल्लेखनीय है कि 12 मार्च को राज्यसभा के 63 विपक्षी सदस्यों द्वारा एक नोटिस प्रस्तुत किया गया था। यह नोटिस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324(5) और 124(4) के तहत दिया गया था। इसके साथ ही चीफ इलेक्शन कमिश्नर एंड अदर इलेक्शन कमिश्नर्स एक्ट 2023 तथा जजेस (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 के प्रावधानों का हवाला दिया गया था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करना था। राज्यसभा के सभापति ने सभी तथ्यों और पहलुओं का गहन और निष्पक्ष मूल्यांकन करने के बाद इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने जजेस (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 की धारा 3 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए नोटिस को “एडमिट”नहीं किया। इस फैसले का सीधा अर्थ यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। मामला प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो गया। संसद में इस मुद्दे पर आगे कोई जांच या बहस नहीं होगी। वीरेंद्र/ईएमएस/07अप्रैल2026