- उद्योगों में उत्पादन ठप सा इंडस्ट्रियल सेक्टर को हजारों करोड़ का नुकसान भोपाल (ईएमएस)। इजरायल-ईरान युद्ध के चलते मध्य प्रदेश के व्यापार-व्यवसाय भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। बीते 38 दिनों में हजारों लोग अपनी नौकरी गंवा चुके हैं। उद्योगों में उत्पादन ठप सा हो गया है। जिसकी वजह से एमपी के इंडस्ट्रियल सेक्टर को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। मध्य प्रदेश में युद्ध के कारण सिर्फ एलपीजी गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत नहीं थी। बल्कि कच्चे तेल की जरूरत से जुड़े तमाम सेक्टर युद्ध की मार झेल रहे हैं। एमपी के सबसे प्रमुख व्यावसायिक केंद्र पीथमपुर इंदौर और सांवेर रोड क्षेत्र में मौजूद प्लास्टिक फार्मा और पैकेजिंग जैसे उद्योगों में आलम यह है कि मिडिल ईस्ट से सप्लाई होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने के कारण यहां अधिकांश उद्योगों में उत्पादन आधा बचा है। 60 से 100 फीसदी तक बढ़ गया ट्रांसपोर्टेशन का खर्च इतना ही नहीं उद्योग चलाने के लिए मिडिल ईस्ट से आने वाले सामान को यूरोपीय देशों के रास्ते से मंगवाए जाने के कारण ट्रांसपोर्टेशन का खर्च 60 से 100 फीसदी तक बढ़ गया है। साथ ही तैयार माल का निर्यात ही नहीं हो पा रहा है। सबसे ज्यादा असर पीथमपुर के प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा है जो पीवीसी पाइप तैयार करके दुनिया भर में निर्यात करता है। यहां प्लास्टिक ग्रेन्यूल की आपूर्ति नहीं होने से पीवीसी माल बनाने वाली कई यूनिट्स बंद हो चुकी हैं। जंग नहीं रुकी तो कपड़ा उद्योग ठप इसके अलावा इनमें काम करने वाले श्रमिक अब एक शिफ्ट में ही काम कर पा रहे हैं। इसी प्रकार अमेरिका समेत कई देशों को दवाई सप्लाई करने वाला इंदौर का फार्मा सेक्टर भी कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने से परेशान है। इसके अलावा गैस के अभाव में विभिन्न जीवन रक्षक इंजेक्शन और दवाइयों का उत्पादन भी 40त्न तक घट गया है। जाहिर है इस स्थिति में दवाइयां महंगी होगी। श्रमिकों की संख्या 40 हजार से घटकर 20 हजार हुई इधर ऑटोमोटिव सेक्टर में मशीनों को चलाने के लिए लगने वाले ईंधन की कमी के बावजूद जो प्रोडक्शन हो रहा है उसके निर्यात के टेंडर ही नहीं मिल रहे हैं। वहीं विभिन्न निर्माण एजेंसियों में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या 40 हजार से घटकर 20 हजार रह गई है।पीथमपुर औद्योगिक संगठन के प्रमुख और अर्थशास्त्री गौतम कोठारी का कहना है कि युद्ध के हालात के कारण अब तक हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। क्योंकि उद्योगों को चलाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत ईरान से प्राप्त होता है। कच्चा माल नहीं मिल पाने के कारण अरबों रुपए के कॉन्ट्रैक्ट पूरे नहीं हो पा रहे हैं। जो माल मिल रहा है उसमें भी एक्सपोर्ट टाइम बहुत लंबा है जिससे माल भाड़ा दोगुना हो चुका है। दवाइयां को तैयार करने का सामान की आपूर्ति भी प्रभावित गौतम कोठारी ने कहा, फार्मा सेक्टर में दवाइयां को तैयार करने वाला सामान मिडिल ईस्ट और चीन जैसे देशों से आता है। जिसकी आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। वहीं इंदौर रीजन में पीवीसी से तैयार होने वाले उत्पादों के नाम 60 फीसदी से 100 फीसदी तक बढ़ गए हैं। इधर अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख सुशील सुरेखा बताते हैं कि इंदौर में चिप्स, मोबाइल, टीवी, फ्रिज और लगभग हर सेक्टर क्रूड ऑयल से जुड़े हुए हैं जो इस समय युद्ध की त्रासदी झेल रहे हैं। माल मंगवाने के लिए सीधा रास्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण बंदरगाह पर भी माल अटका पड़ा है। जिसके कारण विभिन्न प्रकार के उद्योगों का निर्माण और निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विनोद / 07 अप्रैल 26