राज्य
07-Apr-2026


- 1 दिन में 660 पराली की आग, ये 5 बड़े राज्यों की 97.7 प्रतिशत भोपाल (ईएमएस)। मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल को खेतों में लगी आग ने प्रदूषण और कृषि प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही दिन में गेहूं की कटाई के बाद अवशेष जलाने की 660 घटनाए दर्ज हुई हैं। यह संख्या पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में दर्ज कुल मामलों की 97.7 प्रतिशत है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के अनुसार, 1 अप्रैल को पांच प्रमुख राज्यों में कुल 675 फसल अवशेष जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं। इनमें से अकेले मध्य प्रदेश में 660 मामले सामने आए। इसके मुकाबले उत्तर प्रदेश में 14, पंजाब में 14 और हरियाणा में केवल एक घटना दर्ज हुई, जबकि दिल्ली में ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं किया गया। उपग्रह से होती है पराली की निगरानी यह आंकड़े उपग्रह आधारित निगरानी प्रणाली से प्राप्त हुए हैं। फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए कंसोर्टियम फॉर रिसर्च आन एग्रो-इकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस की प्रकाश आधारित ट्रैकिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक के जरिए देशभर में खेतों में लगने वाली आग की पहचान की जाती है। पिछले साल भी अव्वल था मध्य प्रदेश पिछले साल अप्रैल-मई के दौरान भी मध्य प्रदेश में फसल अवशेष जलाने की घटनाएं पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से अधिक दर्ज की गई थीं। मध्य प्रदेश सरकार ने दिसंबर 2025 में विधानसभा को जानकारी दी थी कि अप्रैल 2020 से नवंबर 2025 के बीच पराली जलाने के मामलों में 546 पुलिस प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बावजूद घटनाओं की संख्या में कमी नहीं आ पाई है। रोकने के लिए प्रावधान, लेकिन निष्प्रभावी मध्य प्रदेश में नरवाई जलाने से रोकने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए गए हैं। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने 20 नवंबर 2024 को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई करते हुए शहरों के आसपास के क्षेत्रों में नरवाई जलाने पर रोक लगाने को कहा गया था। 21 फरवरी 2025 को कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने भी कहा था कि, राज्य में नरवाई जलाने की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। किसानों को खेत में ही अवशेष प्रबंधन के लिए 42 हजार 500 से अधिक कृषि उपकरण वितरित किए गए, ताकि नरवाई जलाने की प्रवृत्ति कम हो सके। लेकिन इनका असर धरातल पर नहीं दिखा। जागरूकता अभियान और वैकल्पिक योजना भी बनाई मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने मार्च 2025 में किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया था। इसके लिए 8 करोड़ रुपए का बजट भी मंजूर किया गया। तत्कालीन प्रमुख सचिव पर्यावरण नवनीत मोहन कोठारी की अध्यक्षता में 4 अप्रैल को हुई बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि, गेहूं की कटाई में उपयोग होने वाली मशीनों में रिपर और बेलर लगाना अनिवार्य किया जाए। साथ ही नरवाई के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के ताप विद्युत गृहों में कृषि अवशेषों के उपयोग की योजना पर भी चर्चा हुई। हालांकि इन उपायों का व्यापक स्तर पर प्रभावी अमल अभी तक नहीं हो सका है। विनोद / 07 अप्रैल 26