- एटीएम की चोरी के बाद अब बम की धमकी पर पर्दा डालने की कोशिश: गुना डाकघर में सुरक्षा से खिलवाड़ गुना (ईएमएस)। शहर के कर्नलगंज स्थित मुख्य डाकघर और उसके पासपोर्ट सेवा केंद्र को ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने का मामला सामने आने के बाद डाकघर प्रबंधन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। हैरानी की बात यह है कि यह धमकी 25 मार्च के आसपास मिली थी और इसके बाद दो-तीन बार इसी तरह के मेल भी आए, लेकिन डाकघर प्रबंधन ने इसकी सूचना पुलिस को देना तक जरूरी नहीं समझा। करीब 10 से 15 दिन तक इस संवेदनशील जानकारी को दबाए रखना अब बड़े सवाल खड़े कर रहा है। मामले का खुलासा तब हुआ जब मंगलवार को पुलिस अधीक्षक हितिका वासल को इसकी जानकारी मिली। इसके बाद तत्काल कोतवाली पुलिस की टीम मुख्य डाकघर पहुंची और वहां पूछताछ शुरू की। देशभर में हाल के दिनों में डाकघरों और पासपोर्ट सेवा केंद्रों को इस तरह की धमकियां मिलने की घटनाएं सामने आई हैं, जिन पर कई जगह पुलिस ने जांच भी की है। लेकिन गुना में डाकघर के जिम्मेदारों की ओर से इस गंभीर मामले को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब इस संबंध में पोस्ट मास्टर एसएस साहू से बात की गई तो उन्होंने पहले ऐसे किसी मेल के आने से ही इनकार कर दिया, बाद में बयान बदलते हुए कहा कि वे इस मामले पर कुछ नहीं बोल सकते। इससे उनकी भूमिका और भी संदिग्ध नजर आने लगी है। यह पहला मामला नहीं है जब डाकघर प्रबंधन सवालों के घेरे में आया हो। इससे पहले पोस्ट ऑफिस के एटीएम से करीब तीन लाख रुपए गायब होने के मामले में भी लापरवाही सामने आई थी, जिसे दबाने की कोशिश की गई थी। उस मामले की जांच अब भी जारी है। पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने बताया कि देश के कई शहरों में इस तरह के धमकी भरे मेल आए हैं और इसकी जांच की जा रही है। गुना से कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिलने के बावजूद पुलिस टीम भेजकर जांच शुरू कर दी गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि अगर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं होती और कोई अप्रिय घटना हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। - दोपहर 12:10 बजे धमाके का था दावा शहर के मुख्य डाकघर एवं पासपोर्टट केंद्र को भेजे गए धमकी भरे ई-मेल की भाषा और उसमें किए गए दावे बेहद चौंकाने वाले हैं। इस मेल में न केवल पासपोर्ट शाखा को बम से उड़ाने की धमकी दी गई, बल्कि तमिलनाडु की राजनीति, क्षेत्रीय दलों और मीडिया घरानों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मेल भेजने वाले ने खुद को कोयंबटूर का निवासी बताते हुए दावा किया है कि राजनीतिक दलों ने उनका इस्तेमाल किया और अब उनकी आवाज दबाई जा रही है। मेल में साइनाइड जहरीली गैस और आरडीएक्स के इस्तेमाल की बात कहते हुए दोपहर 12:10 बजे का समय मुकर्रर किया गया था। इसमें यह भी लिखा गया है कि वे केवल संपत्ति को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं, इसलिए लोगों को हटा लिया जाए। चौंकाने वाली बात यह है कि मेल में नक्सलियों और बाहरी ताकतों की मदद लेने का भी जिक्र किया गया है। इतनी संवेदनशील और खतरनाक भाषा वाले मेल को 13 दिनों तक पुलिस से छिपाए रखना डाकघर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करता है। फिलहाल पुलिस की साइबर सेल इस मेल के आईपी एड्रेस और भेजने वाले के मूल स्थान की सघन जांच कर रही है। -सीताराम नाटानी