-यूक्रेनी अखबार का दावा- फ्रांस के अड़ियल रवैये के पीछे रूस का डर बताने की कोशिश पेरिस,(ईएमएस)। भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर बातचीत चल जारी है। इस सौदे पर अगले साल तक मुहर लगने की उम्मीद है, लेकिन उससे पहले सोर्स कोड और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को लेकर बात नहीं बन पा रही है। फ्रांस सोर्स कोड शेयर नहीं करना चाहता। अनुमानित तौर पर भारत करीब 35-40 अरब डॉलर में 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीद सकता है और इस सौदे से फ्रांस की जीडीपी में भी उछाल आएगा। इसके बावजूद सोर्स कोड पर सहमति नहीं बन पा रही है। फ्रांस राफेल का सोर्स कोड भारत को सौंपने के लिए तैयार नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत और फ्रांस के बीच होने वाले इस विशालकाय राफेल लड़ाकू विमान डील पर पूरी दुनिया की नजर है। इस बीच यूक्रेनी अखबार ने फ्रांस के अड़ियल रवैये के पीछे रूस का डर बताने की कोशिश की है। इसने बताया है फ्रांस के लिए ये नेशनल सिक्योरिटी का मामला लगता है। मार्च की शुरुआत में ही डसॉल्ट एविएशन के सीईओ ने कहा था कि वह यह तय करना चाहते हैं कि राफेल सौदे पर इसी साल हस्ताक्षर हो जाएं, लेकिन अप्रैल की शुरुआत तक इस मामले में किसी भी तरह की प्रगति नहीं हुई है। कई रिपोर्ट्स में अलग अलग सूत्रों का हवाला देते हुए दावा किया है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर टलने का मुख्य कारण सोर्स कोड पर सहमति बनना नहीं है। पूरी संभावना है कि पेरिस और दिल्ली के सामने सोर्स कोड से जुड़ा मुद्दा आ गया है जो राफेल के ऑनबोर्ड सिस्टम सॉफ्टवेयर को अपडेट करने के लिए भारतीय पक्ष को मिलने वाली पूरी पहुंच से संबंधित है। सोर्स कोड का मुद्दा एक साल पहले भी उठा था और फ्रांस का डर इस दावे के बाद बढ़ गया है कि नीदरलैंड के रक्षा राज्य सचिव ने एफ-35 के सोर्स कोड को हैक करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि एफ-35 लड़ाकू विमान के सोर्स कोड को हैक करना और अमेरिका की मदद के बिना काम चलाना संभव है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत अगर अरबों डॉलर की इस डील को करेगा तो उसे कई चीजें चाहिए। वो विमान में अपनी मर्जी के बदलाव चाहता है। जैसे कि अपने हथियार स्वतंत्र रूप से जोड़ना, ईडब्ल्यू सूट को अपडेट करना अपने सस्पेंशन सिस्टम को इंटीग्रेट करना आदि। पूर्व फाइटर जेट पायलट विजयेन्द्र के ठाकुर ने कहा है कि भारत ने जगुआर फाइटर जेट के समय जो गलती की थी वो फिर से ना करे। उन्होंने कहा कि भारत पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट में लिखवाए कि भविष्य में वो ना सिर्फ अपनी मर्जी से सोर्स कोड में एक्सेस चाहेगा बल्कि जब भी सॉफ्टवेयर को अपडेट किया जाए तो उसमें भारत को कम से कम पैसा देना पड़े। यूक्रेनी अखबार ने लिखा है अगर पेरिस भारत की मांगों को नहीं मानता है तो हथियारों, कलपुर्जों, विमानों की मरम्मत और आधुनिकीकरण की लगातार बिक्री से उन्हें मिलने वाला एक बहुत ही अहम राजस्व का स्रोत छिन जाएगा। जैसे ही भारत को राफेल को स्वतंत्र रूप से अपडेट करने की क्षमता मिल जाएगी उदाहरण के लिए, मेटेरो मिसाइलों की जगह उनकी अपनी गंदिवा मिसाइलें लगाई जाएंगी। इसके अलावा सिर्फ फ्रांसीसी क्रूज मिसाइलें, या डेमोसेल ऑप्टिकल साइटिंग स्टेशन खरीदने की भी जरूरत नहीं रहेगी। इनकी जगह भारतीय विकल्प भी सामने आ सकते हैं। विजयेन्द्र के ठाकुर ने एनबीटी ऑनलाइन से कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल का वजन इतना ज्यादा है कि राफेल से फिलहाल उसे फायर करना मुश्किल काम है। इसीलिए उसे एसयू-30एमकेआई से इंटीग्रेट किया गया है। जबकि यूक्रेनी अखबार ने दावा किया है कि फ्रांस ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि वे भारतीय राफेल विमानों में भारतीय हथियारों को शामिल करने के खिलाफ नहीं हैं लेकिन इस पूरी प्रक्रिया पर डसॉल्ट एविएशन का ही पूरा नियंत्रण रहेगा। क्योंकि यह आखिरकार फ्रांस की राष्ट्रीय सुरक्षा का ही मामला है। सिराज/ईएमएस 08 अप्रैल 2026