वाशिंगटन,(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध में एक नया खुलासा सामने आया है। अमेरिका के एफ-15 जेट क्रैश होने के पीछे रूस का हाथ है। रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया सूत्रों ने बताया कि ईरान ने अमेरिकी एफ-15 फाइटर जेट को गिराने के लिए रूस से मिले अत्याधुनिक शोल्डर-फायर मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले अली खामेनेई के समय ही यह डील हुई थी। ईरान ने रूस के साथ करीब 450 मिलियन पाउंड की डील कर 500 वर्ब लॉन्चर और 2,500 मिसाइलें खरीदी थीं, जिसमें से कुछ की डिलीवरी इस साल जनवरी में हो चुकी थी। माना जा रहा है कि इन्हीं मिसाइलों का इस्तेमाल कर अमेरिकी जेट को निशाना बनाया गया। खुफिया विश्लेषकों का दावा है कि अमेरिकी एफ-15 जेट को 9के333 मैनपैड्स सिस्टम से टारगेट किया। यह एक पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है, जो खासतौर पर कम ऊंचाई पर उड़ रहे विमान, हेलीकॉप्टर और ड्रोन को मार गिराने के लिए बनाया गया है। इन मिसाइलों में तीन-चैनल इंफ्रारेड सीकर होता है, जो पारंपरिक फाइटर जेट के हीट डिकॉय को भी धोखा दे सकता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 5 किलोमीटर ऊंचाई तक होती है, जिससे लो-एल्टीट्यूड ऑपरेशन कर रहे विमानों के लिए खतरा कई गुना बढ़ जाता है। अमेरिका ने ईरान युद्ध की शुरुआत में ईरान के लंबी दूरी के एस-300 एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह करने का दावा किया था और ‘पूरी हवाई बढ़त’ हासिल करने की बात कही थी। लेकिन इस घटना के बाद साफ हुआ है कि ईरान ने अब अपनी रणनीति बदल ली है। लंबी दूरी के सिस्टम के बजाय अब वह छोटे, मोबाइल और छिपे हुए एयर डिफेंस हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे अमेरिकी जेट्स के लिए खतरा बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिका के एफ-15 को गिरा दिया था। इसके दोनों क्रू मेंबर इजेक्ट होकर ईरान के अंदर गिरे। इसके बाद शुरू हुआ एक बेहद जटिल और खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन। अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने तेजी से एक बड़े ‘कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू’ मिशन को अंजाम दिया।इस दौरान सैकड़ों सैनिक, दर्जनों एयरक्राफ्ट और हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। आशीष/ईएमएस 07 अप्रैल 2026