‘ 100 फीसद ऑर्गेनिक राज्य बनने के बाद बढ़ी जैव विविधता, किसानों की आय और इको-टूरिज्म को मिला बढ़ावा गंगटोक,(ईएमएस)। सिक्किम को लेकर अक्सर यह दावा किया जाता है कि जैविक खेती ने इसे “कीटों का स्वर्ग” बना दिया है, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। वर्ष 2016 में भारत का पहला 100 फीसद प्रमाणित जैविक राज्य बनने के बाद सिक्किम ने न केवल पर्यावरण संरक्षण में मिसाल पेश की, बल्कि टिकाऊ कृषि का सफल मॉडल भी स्थापित किया। राज्य सरकार ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया। इसके स्थान पर वर्मीकम्पोस्ट, नीम-आधारित जैविक कीटनाशक और गोबर से बनी खाद को बढ़ावा दिया गया। इस बदलाव का सकारात्मक असर मिट्टी की गुणवत्ता पर पड़ा, जिससे उसकी उर्वरता में सुधार हुआ और जल स्रोतों का प्रदूषण कम हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, जैविक खेती के कारण परागणकों—जैसे मधुमक्खियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो एक स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत है। इसके साथ ही जैव विविधता में भी इजाफा हुआ है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बेहतर बना है। आर्थिक दृष्टि से भी यह परिवर्तन लाभकारी साबित हुआ है। जैविक उत्पादों को बाजार में प्रीमियम मूल्य मिलने से किसानों की आय में वृद्धि हुई है। साथ ही, राज्य में इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिला है, जिससे पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वैश्विक स्तर पर मिली सराहना सिक्किम के इस प्रयास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (एफएओ) ने राज्य को ‘फ्यूचर पॉलिसी गोल्ड अवार्ड’ से सम्मानित किया है। इस प्रकार सिक्किम का यह अनुभव साबित करता है कि रसायन-मुक्त खेती न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि यह आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से भी टिकाऊ विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। हिदायत/ईएमएस 08 अप्रैल 2026