राष्ट्रीय
08-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। 7वीं सदी का एक किस्सा है। एक रात मालाबार के राजा चेरामन को सपना आया। उन्होंने देखा कि आसमान में चांद के दो टुकड़े हुए हैं। अगले दिन राजा ने दरबार में ज्योतिषियों को बुलवाया और सपना समझने की कोशिश की, लेकिन वे संतुष्ट नहीं हुए। तभी अरब से आए कुछ मुस्लिम व्यापारी उनसे मिलने आ गए। राजा ने उन्हें अपने सपने के बारे में बताया। व्यापारियों ने राजा को मक्का-मदीना के पैगंबर मोहम्मद के बारे में बताकर कहा कि यह उन्हीं का चमत्कार होगा। राजा ने कहा, ‘मैं पैगंबर से मिलना चाहता हूं।’ मुस्लिम व्यापारी ये सुन काफी खुश हुए और मक्का-मदीना जाने की तैयारी करने लगे। राजा ने भी अपने दरबारियों को राज-पाट का काम सौंप दिया। इसके बाद राजा, व्यापारियों के साथ समुद्र के रास्ते नाव पर सवार होकर मक्का के लिए निकल पड़े। मक्का-मदीना पहुंचकर राजा पैगंबर मोहम्मद से मिले। कुछ समय उनके साथ रहे। वे यहां मौजूद दुनिया की पहली मस्जिद‘अल-हरम’ में गए। पैगंबर से प्रभावित होकर राजा चेरामन ने इस्लाम अपनाया और मुस्लिम बन गए। पैगंबर ने उन्हें नया नाम दिया कि ‘ताजुद्दीन’। यानी ‘धर्म का मुकुट’। राजा चेरामन अपने देश लौटने के लिए जमीनी रास्ते से रवाना हुए। लेकिन बीच रास्ते में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। ओमान पहुंचते ही उनकी मृत्यु हो गई। बीमारी के दौरान राजा को पहले ही एहसास हो गया था कि वे जिंदा नहीं बचने वाले है। इसलिए उन्होंने एक खत लिखा और इस्लामिक विद्वान मलिक बिन दीनार को सौंप दिया। दीनार कुछ वक्त बाद मालाबार पहुंचे। उन्होंने राजा चेरामन के अधिकारियों को खत सौंपा। खत में राजा का आदेश था कि कोडंगलूर में वीरान पड़े एक बौद्ध विहार की जगह पर मस्जिद बनाई जाए।’ अधिकारियों और दीनार ने राजा के नाम पर 629 ईस्वी में चेरामन जुमा मस्जिद बनावई। यानी आज से 1400 साल पहले एक हिंदू राजा ने केरलम में भारत की पहली और दुनिया की दूसरी मस्जिद बनवाई थी और यहीं से केरलम में इस्लाम धर्म फैला। अभी केरलम में चुनाव है और यहां की 140 में से 32 सीटों पर मुस्लिम विधायक हैं। यहां की 26.5 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। यानी केरलम के चुनाव में मुस्लिम एक अहम कड़ी है। चेरामन जुमा मस्जिद के अधिकारी भी हिंदू राजा चेरामन के मस्जिद बनवाने और पैगंबर मोहम्मद से मिलने की यही कहानी बताते हैं। राजा की यात्रा का जिक्र अरबी पांडुलिपि ‘किस्सत शकरवती फार्माद’ में भी मिलता है, जिसे ‘महान चेरा शासक की कहानी’ माना जाता है। त्रावणकोर राजवंश की राज्यभिषेक परंपरा में भी चेरामन की मक्का-मदीना यात्रा के सबूत हैं। राज्याभिषेक में एक वाक्य बोला जाता रहा है, मैं यह तलवार तब तक रखूंगा, जब तक मक्का गए चाचा वापस नहीं आ जाते।’ यहां चाचा राजा चेरामन को कहा गया है। राजा की पैगंबर से मुलाकात का एक और दिलचस्प किस्सा है। पैगंबर के साथ रहने वाले इस्लामिक विद्वान अबू सईद अल खुदरी ने अपनी किताब ‘अल मुस्तदरक’ में इसका जिक्र किया कि भारत के एक राजा ने पैगंबर मोहम्मद को एक मर्तबान, यानी चीनी मिट्टी का बर्तन भेंट किया। इसमें अदरक का अचार था। पैगंबर ने इस अपने साथियों में बांटा और मुझे भी एक टुकड़ा खाने को मिला।’ आशीष/ईएमएस 08 अप्रैल 2026