वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्तों तक चले खूनी संघर्ष के बाद आखिरकार युद्धविराम पर सहमति बन गई है। 28 फरवरी को जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू की थी, तब उन्हें वेनेजुएला जैसी आसान जीत की उम्मीद थी। हालांकि, ईरान के कड़े प्रतिरोध और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ते दबाव ने अमेरिका को वार्ता की मेज पर आने को मजबूर कर दिया। जहां ईरान में इस युद्धविराम को एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है और जश्न का माहौल है, वहीं अमेरिका के भीतर राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है।ताजा घटनाक्रम में डेमोक्रेटिक पार्टी के 85 से अधिक सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप को पद से हटाने की मांग तेज कर दी है। ट्रंप पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने यह युद्ध केवल एप्सटीन फाइल्स से जुड़े विवादों और अपनी छवि पर लगे दागों को छिपाने के लिए छेड़ा था। अब अमेरिका में उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। विरोध की मुख्य वजह ट्रंप द्वारा ईस्टर के मौके पर सोशल मीडिया पर की गई एक विवादित और अभद्र टिप्पणी बनी है, जिसे उनके बदलते रुख और अस्थिर स्वभाव का प्रमाण माना जा रहा है। सांसदों का तर्क है कि ईरान युद्ध के दौरान बार-बार रणनीति बदलना और सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की भाषा का प्रयोग करना यह दर्शाता है कि ट्रंप मानसिक रूप से शासन चलाने के लिए फिट नहीं हैं। इसी के मद्देनजर अमेरिकी कांग्रेस में संविधान के 25वें संशोधन की धारा-4 लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है। यह प्रावधान अमेरिका में किसी राष्ट्रपति को तब हटाने की शक्ति देता है जब वह अपने कर्तव्यों को निभाने में असमर्थ हो। तो छोड़ना पड़ेगी राष्ट्रपति की कुर्सी 25वें संशोधन की चौथी धारा के तहत उपराष्ट्रपति और कैबिनेट का बहुमत (15 में से कम से कम 8 सदस्य) लिखित रूप में यह घोषित कर सकते हैं कि राष्ट्रपति अक्षम हैं। ऐसी स्थिति में उपराष्ट्रपति तुरंत एक्टिंग राष्ट्रपति का कार्यभार संभाल लेता है। यदि राष्ट्रपति इसका विरोध करते हैं, तो मामले का फैसला कांग्रेस में दो-तिहाई बहुमत से करना होता है। वर्तमान में विपक्षी सांसद रिपब्लिकन नेताओं और उपराष्ट्रपति से यह मांग कर रहे हैं कि वे देश के हित में साहस दिखाएं और ट्रंप को पद से हटाकर सत्ता की बागडोर संभालें। अमेरिका में बढ़ता यह आंतरिक राजनीतिक गतिरोध आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप ले सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस/08अप्रैल2026