08-Apr-2026
...


जयराम रमेश ने तंज कसते हुए कहा, 56 इंच का सीना सिकुड़ गया नई दिल्ली (ईएमएस)। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र की विदेश नीति पर गंभीर चिंता जाहिर की है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया युद्धविराम में पाकिस्तान द्वारा निभाई गई मध्यस्थता की भूमिका को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए गंभीर झटका बताया है। क्या है पूरा मामला? दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अपने बमबारी और हमले के अभियान को रोककर दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा की है। इसके जवाब में ईरान ने भी ट्रंप की शांति पहल को स्वीकार किया है। ईरान दो सप्ताह तक सैन्य अभियानों को रोकने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करने पर सहमत हो गया है। इस पूरे मामले में दोनों देशों के बीच वार्ता की मेजबानी कर पाकिस्तान ने एक अहम भूमिका निभाई है। इस पर कांग्रेस नेता जयराम ने पोस्ट लिखकर पीएम मोदी और उनकी विदेश नीति की तीखी आलोचना की। कांग्रेस नेता रमेश ने तंज कसते हुए कहा कि अब स्वयंभू विश्वगुरु पूरी तरह से बेनकाब हुआ हैं और उनका 56 इंच का सीना सिकुड़ गया है। उन्होंने विदेश मंत्री पर भी निशाना साधा जिन्होंने पहले पाकिस्तान को महज एक दलाल बताकर खारिज किया था। कांग्रेस नेता रमेश ने 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट पर मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का हालिया इजरायल दौरा तब हुआ था जिसने भारत के वैश्विक कद को घटा दिया। रमेश के अनुसार, पीएम मोदी ने गाजा में इजरायल की आक्रामकता और वेस्ट बैंक में उसकी विस्तारवादी नीतियों पर कुछ नहीं कहा। साथ ही, उन्होंने ट्रंप द्वारा इस्तेमाल की जा रही अस्वीकार्य और अपमानजनक भाषा पर भी पीएम मोदी की चुप्पी को उनकी कायरता बताया। पाकिस्तान को विदेशी दानदाताओं की खैरात पर निर्भर एक दिवालिया अर्थव्यवस्था बताकर रमेश ने कहा कि युद्धविराम में पाकिस्तानी भूमिका पर पीएम मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति की शैली और प्रभाव दोनों के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का समर्थन करने वाले पाकिस्तान को अलग-थलग करने और एक विफल राष्ट्र साबित करने की नीति नाकाम साबित हुई है। उन्होंने इसकी तुलना मुंबई आतंकी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह की सफल कूटनीति से की। उन्होंने पूछा कि मोदी सरकार या उनकी टीम ने अभी तक यह स्पष्ट क्यों नहीं किया कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर को अचानक क्यों रोक दिया था? उन्होंने याद दिलाया कि इसकी पहली घोषणा अमेरिकी विदेश मंत्री ने की थी और अमेरिकी राष्ट्रपति इसके लिए सौ बार से ज्यादा श्रेय ले चुके हैं। एशिया में अमेरिका और इज़राइल के साथ ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और हालिया दो सप्ताह के संघर्षविराम पर केंद्रित है। यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान के शीर्ष नेतृत्व की टारगेटेड किलिंग से शुरू हुआ, और यह घटना प्रधानमंत्री मोदी की इज़राइल यात्रा के ठीक दो दिन बाद हुई। लेख में मोदी की कूटनीति और नैरेटिव प्रबंधन की आलोचना की गई है, क्योंकि उन्होंने गाजा में इज़राइल की कार्रवाई और वेस्ट बैंक में उसकी नीतियों पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। युद्धविराम में पाकिस्तान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है, जिसने मोदी की अत्यधिक व्यक्तिनिष्ठ कूटनीति और भारत की वैश्विक छवि दोनों के लिए चुनौती पेश की। लेख में उल्लेख है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन देने के बावजूद पाकिस्तान की भूमिका दुनिया के नजरिए में पूरी तरह विफल नहीं रही। यह दर्शाता है कि आर्थिक रूप से कमजोर और बाहरी सहायता पर निर्भर पाकिस्तान ने भी महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री मोदी और उनकी टीम की रणनीतियों, जैसे ऑपरेशन सिंदूर को 10 मई 2025 को अचानक रोकने का निर्णय, भी सवालों के घेरे में हैं। लेख में यह भी कहा गया है कि मोदी की चुप्पी न केवल इज़राइल की आक्रामकता पर, बल्कि व्हाइट हाउस में उनके करीबी मित्रों द्वारा उपयोग की गई अस्वीकार्य भाषा पर भी स्पष्ट रूप से दिखती है। आशीष दुबे / 08 अप्रैल 2026