लेख
08-Apr-2026
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ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के लिए युद्ध विराम के लिए सहमति बन गई है। अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसका ऐलान किया। ईरान ने भी अधिकृत रूप से इसकी घोषणा की। सीज फायर के बाद हमले तत्काल रूप से बंद हो गए हैं। ईरान ने इसके लिए अधिकृत रूप से आदेश जारी किए हैं। युद्ध विराम को लेकर 10 शर्तों के साथ ईरान ने प्रस्ताव पेश किया है। चीन द्वारा दोनों पक्षों को समझाइस दिए जाने के बाद 15 दिन के लिए युद्ध विराम घोषित किया गया है। इसकी घोषणा होते ही, इसके सकारात्मक परिणाम भारत सहित दुनिया के सभी देशों में देखने को मिले हैं। एक नई आशा की किरण जागी है। दोनों पक्ष गंभीरता के साथ विचार करके स्थाई रूप से युद्ध रोकने और शां‎ति के लिए प्रयास करेंगे। इसके लिए दोनों पक्षों का एक मंच पर आना जरूरी था। पाकिस्तान ने तीनों पक्षों के बीच बातचीत के ‎लिये जो प्रयास किया, वह सार्थक हुआ। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा इस फैसले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख असीम मुनीर का उल्लेख किया। डोनाल्ड ट्रंप ने यह उल्लेख किया है, ईरान को स्टेट आफ हार्मोज को फिर से खोलना होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया, अमेरिका ने अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया है। अमेरिका अब तेहरान के साथ निर्णायक फैसले की स्थिति में आ गया है। अब जो भी समझौता होगा वह दीर्घकालिक शांति के लिए होगा। ईरान की ओर से शीर्ष अधिकारी बातचीत करने के लिए पा‎‎किस्तान आएंगे। अमेरिका के उपराष्ट्रपति इस बातचीत में शामिल होंगे। इस फैसले के आते ही सारी दुनिया के देशों ने राहत की सांस ली है। ऊर्जा संबंधी संकटों और युद्ध को लेकर जो स्थिति बनी हुई थी। उससे सारी दुनिया को अस्थाई रूप से राहत मिली है। भारत में इसका बड़ा असर देखने को मिला। शेयर बाजार ने 2800 अंकों की छलांग लगाई। कच्चे तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी के साथ गिरे। इस युद्ध में अमेरिका द्वारा ईरान को खत्म करने की जो धमकी दी जा रही थी, चीन, रूस और उत्तर कोरिया के इस युद्ध में शा‎मिल होने की संभावना बन गई थी। पिछले एक साल से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह से टैरिफ को लेकर दबाव बना रहे थे। वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को उठाकर अमेरिका में बंधक बनाया गया। इसके तुरंत बाद ईरान पर हमला किया गया। इससे सारी दुनिया के देश अमेरिका से नाराज थे। अमेरिका के अंदर डोनाल्ड ट्रंप का विरोध शुरू हो गया है। अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस की मंजूरी लिए बिना जिस तरह से ईरान पर हमला किया था। अमेरिकी कानून के अनुसार केवल 45 दिन तक वह इस तरह की कार्रवाई राष्ट्रप‎ति कर सकते थे। इसके पहले उन्हें संसद की अनुमति लेना अनिवार्य था। इन सारी परिस्थितियों को देखते हुए डोनाल्ड ट्रंप के पास अन्य कोई विकल्प नहीं था। एक महीने से अधिक युद्ध चलते हुए हो गए थे। युद्ध में ईरान के साथ-साथ इजराइल को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। जिन खाडी के देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे थे, ईरान ने लगभग सभी में ध्वस्त कर ‎दिये हैं। अमेरिका की जो साख दु‎निया में बनी हुई थी, इस युद्ध में वह लगभग खत्म हो गई है। ऐसी स्थिति में डोनाल्ड ट्रंप जल्द से जल्द युद्ध से बाहर निकलना चाहते थे। इसमें पाकिस्तान ने पहल की। चीन ने अपनी सामरिक और आर्थिक शक्ति का एहसास कराकर अमेरिका और ईरान दोनों को एक मंच पर लाने का जो काम किया है। युद्ध ‎‎विराम से सारे विश्व को राहत मिली है। अमेरिका और ईरान के इस युद्ध में सबसे ज्यादा भूमिका इजरायल की थी। ग्रेटर इजरायल की परिकल्पना पर काम कर रहे इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और मोसाद द्वारा जो अमेरिका को जो जानकारी दी गई थी, वह सही नहीं थी। अति उत्साह में डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध में कूद गए। जिसके कारण अब उन्हें राष्ट्रपति पद को बचा पाना मुश्किल दिख रहा है। इसके अलावा अमेरिका में नवंबर माह में जो चुनाव होने हैं। उसको लेकर उन्हें अपनी पार्टी से चुनौती मिलने लगी है। डोनाल्ड ट्रंप का स्वभाव है वह आक्रामक होकर अपनी विपक्षी के ऊपर हमला करते हैं। पिछले 1 साल में जिस तरह से डोनाल्ड ट्रंप पूरी दुनिया में एक्सपोज हुए हैं। उसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति की जो छवि होती थी, उसमें बहुत बड़ा बट्टा लग गया है। अमेरिका को सारी दुनिया के देशों से कई तरह की चुनौतियां मिलना शुरू हो गई हैं। डॉलर मुद्रा को चुनौती मिल रही है। नाटो और यूरोपीय देशों ने अमेरिका का साथ एक तरह से छोड़ दिया है। ऐसी स्थिति में ईरान से ज्यादा अमेरिका को युद्ध ‎विराम की जरूरत थी। इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू इसमें सबसे बड़ी बाधा बने हुए थे। जिस तरह से ईरान ने तेल अवीव और इजरायल के विभिन्न हिस्सों में हमला करके जो नुकसान पहुंचाया है, उसके कारण अब इजराइल भी ठंडा पड़ गया है। इजराइल का इतिहास रहा है कि वह अपनी बात पर ज्यादा देर कायम नहीं रहता है। इस युद्ध विराम में यदि कोई पलीता लगाने का काम करेगा, तो वह इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहु ही होंगे। इन 15 दिनों में कोई हमला नहीं हुआ तो निर्णायक समझौते के लिए वातावरण बनने में अब कोई दिक्कत नहीं है। ईरान ने अपनी ताकत का एहसास कर दिया है। पिछले 47 सालों से उसके ऊपर लगातार प्रतिबंध थोपे जा रहे थे। इस युद्ध के बाद अब उसके साथ बातचीत में समान रूप से व्यवहार करना होगा। इस युद्ध ने सभी के अहंकार को तोड़ दिया है। सभी पक्षों को युद्ध में भारी नुकसान हुआ है। सारी दुनिया के देशों को इस युद्ध में भारी नुकसान हुआ है। कच्चा तेल, गैस, खाद्यान्न एवं अन्य सामान की आपूर्ति दु‎निया भर में बाधित हुई है। सारी दुनिया के देश चाहते थे, जल्द से जल्द इस मामले का कोई हल निकले। जो हुआ है, वह बहुत अच्छा हुआ है। ईरान इस बार पूरी तरह सतर्क है। उसके पास जो अस्त्र-शस्त्र हैं। जितना अच्छा उपयोग इस युद्ध में ईरान ने किया है, उसके बाद लगता नहीं है, अमेरिका और इजरायल ईरान के साथ कोई खेल करेंगे। कच्चे तेल के दाम घटने के साथ गैस की निर्वाध आपूर्ति शुरू होगी। कुल मिलाकर इस युद्ध विराम का स्वागत सभी देशों द्वारा किया जा रहा है। रूस-चीन जैसी महाशक्तियां भी युद्ध खत्म कराने मे अप्रत्यक्ष रूप से प्रयास कर रहे थे। बातचीत में स्थाई समाधान खोज लिया जाता है। तो यह दुनिया के लिए शांतिपूर्ण प्रयासों की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। एसजे/ 8 अप्रैल /2026