- बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुलिस हिरासत में मौत मामले में 8 पुलिसकर्मियों पर हत्या का आरोप बरकरार रखा मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 12 साल पुराने हिरासत मौत मामले में वडाला रेलवे पुलिस स्टेशन के आठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का आरोप तय करने के आदेश को बरकरार रखा है। यह मामला 25 वर्षीय युवक एग्नेलो वाल्डारिस की मौत से जुड़ा है, जिसकी 2014 में वडाला रेलवे पुलिस की हिरासत में कथित यातना के दौरान मौत हो गई थी। इस फैसले से आरोपी रेलवे पुलिस अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई अदालत द्वारा वर्ष 2022 में दिए गए आदेश को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने आठ अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश अजय गडकरी और न्यायाधीश कमल खता की खंडपीठ ने 32 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह मामला गंभीर है और इसमें पुलिसकर्मियों की भूमिका की विस्तृत जांच जरूरी है। अदालत ने सीबीआई कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) के तहत केस चलाने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पुलिस के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पुलिस हिरासत में इस तरह के अमानवीय व्यवहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि संभव है कि हिरासत में कथित प्रताड़ना के कारण ही अग्नेलो ने भागने की कोशिश की हो, जिसमें उसकी मौत हो गई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि एग्नेलो को अवैध पुलिस हिरासत में बुरी तरह पीटा गया था। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि हिरासत में मौत के मामलों में प्रत्यक्ष साक्ष्य मिलना दुर्लभ होता है, क्योंकि घटनाओं के बारे में केवल पुलिसकर्मी ही जानकारी दे सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि मृत व्यक्ति खुद न्याय की मांग नहीं कर सकता, इसलिए उसके लिए न्याय दिलाना जीवित लोगों की जिम्मेदारी है। * क्या है मामला ? 4 अप्रैल 2014 को 25 वर्षीय अग्नेलो वाल्दारिस को मोबाइल चोरी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का दावा था कि रिमांड के लिए ले जाते समय वह उनकी हिरासत से भागने की कोशिश में तेज रफ्तार लोकल ट्रेन की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौत हो गई। हालांकि, मृतक के परिवार ने इस दावे को झूठा बताते हुए आरोप लगाया कि हिरासत में अग्नेलो के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की गई, जिसके कारण उसकी मौत हुई। मामले को बाद में सीबीआई को सौंपा गया। जांच के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने 17 सितंबर 2022 को आठों पुलिसकर्मियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का आरोप तय करने का आदेश दिया था। इस फैसले को आरोपियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है। उधर मृतक के पिता लियोनार्ड वाल्डारिस का आरोप है कि उनके बेटे को 24 घंटे तक अवैध रूप से हिरासत में रखकर बुरी तरह प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण वह अपनी जान बचाने के लिए ट्रेन की ओर भागा। अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए, जिनमें से कुछ मौत से 12 घंटे पहले और कुछ 24 से 96 घंटे पहले के थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय पुलिस की जांच रिपोर्ट से अधिक महत्वपूर्ण है। हाई कोर्ट ने कहा कि आरोप तय करने के स्तर पर “मजबूत संदेह” पर्याप्त होता है और इस आधार पर ट्रायल चलाया जा सकता है। परिवार ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और मुआवजे की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक जितेंद्र राठौड़, सहायक पुलिस निरीक्षक अर्चना पुजारी, उप-निरीक्षक शत्रुघ्न तोंडसे, हेड कांस्टेबल सुरेश माने, कांस्टेबल रविंद्र माने, विकास सूर्यवंशी, सत्यजीत कांबले और तुषार खैरनार के खिलाफ अब हत्या का मुकदमा चलेगा। हालांकि, अंतिम दोष सिद्ध करने के लिए पुख्ता सबूत जरूरी होंगे। इस फैसले के बाद अब मामले में ट्रायल शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। संजय/संतोष झा-०८ अप्रैल/२०२६/ईएमएस