:: मध्य भारत का दुर्लभ मामला; डॉ. यामिनी गुप्ता और ईएनटी विभाग की टीम ने जटिल ऑपरेशन कर एक साल के बच्चे को दिया नया जीवन :: इंदौर (ईएमएस)। इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल के डॉक्टरों ने बुधवार को वह कर दिखाया जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। मध्यप्रदेश के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के ईएनटी विभाग में एक ऐसा दुर्लभ मामला सामने आया, जिसने अनुभवी सर्जन्स के भी होश उड़ा दिए। विभाग की टीम ने महज एक साल के मासूम के गले में फंसी करीब 3 इंच लंबी ‘जिंदा गोरामी मछली’ को एक बेहद जटिल ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला। मौत को मात देकर लौटे इस मासूम के लिए यह किसी नए जन्म से कम नहीं है। चिकित्सा साहित्य के अनुसार, मध्य भारत में इतनी कम उम्र के बच्चे के साथ ऐसी घटना पहली बार दर्ज की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, बच्चा घर में खेल रहा था, तभी अचानक एक जीवित मछली उसके मुंह में चली गई और सीधे गले के पिछले हिस्से (Oropharynx) में जाकर अटक गई। जब मासूम को एमवाय लाया गया, तब उसकी स्थिति हृदयविदारक थी। बच्चा न तो रो पा रहा था और न ही सांस ले पा रहा था। घबराहट, बेचैनी और मुख से आते खून ने परिजनों की धड़कनें बढ़ा दी थीं। केस की संवेदनशीलता को देखते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. यामिनी गुप्ता ने तुरंत इमरजेंसी रेस्क्यू टीम को मैदान में उतारा। :: चुनौती : मछली का जिंदा होना और हिलते हुए पंख :: इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी और डराने वाली चुनौती मछली का जीवित होना था। मछली के गलफड़ों और तीखे पंखों की निरंतर हलचल से बच्चे के स्वर-यंत्र और भोजन नली के फटने का गंभीर खतरा था। जरा सी चूक बच्चे को हमेशा के लिए खामोश कर सकती थी। इस हाई-स्टेक रेस्क्यू में डॉ. यामिनी गुप्ता के साथ डॉ. वर्षा राठी, डॉ. प्रेम प्रकाश धुर्वे, डॉ. सुरेंद्र पाल अलावा, डॉ. मेघा और डॉ. पूजा ने मोर्चा संभाला। निश्चेतना विभाग की डॉ. मोनिका गांधी ने मासूम को स्थिर किया, जिसके बाद सर्जिकल उपकरणों की मदद से डॉक्टरों ने अत्यंत कुशलता दिखाते हुए मछली को बाहर खींच लिया। :: सावधानी : अभिभावकों के लिए बड़ी चेतावनी :: मछली के बाहर आते ही मासूम की उखड़ती सांसें सामान्य हो गईं। डॉ. गुप्ता ने बताया, यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि चिकित्सा विज्ञान की सीमाओं को परखने वाली परीक्षा थी। इस सफलता ने एमवाय के विशेषज्ञों के कौशल को एक बार फिर साबित कर दिया है। डॉक्टरों ने सख्त लहजे में अभिभावकों को चेतावनी दी है कि छोटे बच्चों की श्वसन नली बहुत संकरी होती है, इसलिए उन्हें जीवित या छोटी वस्तुओं से हमेशा दूर रखें; पल भर की चूक जानलेवा साबित हो सकती है। मौजूदा चिकित्सा रिकॉर्ड्स में पूरे मध्य भारत में ऐसा केस पहले कभी नहीं देखा गया। प्रकाश/08 अप्रैल 2026