मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को अन्नदाता के साथ-साथ ऊर्जादाता बनाने का संकल्प लिया है। इसी संकल्प की देन 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने की ऐतिहासिक घोषणा है। यह मिशन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसान परिवारों के जीवन को संवारने, उनकी आय दोगुनी करने और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक विजनरी संकल्प है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के उत्थान को अपनी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया है। कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए धरातल पर उन्होनें कई ठोस कदम उठाए हैं। डॉ. मोहन यादव के प्रयासों से वर्ष 2026 मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक नई उम्मीद की किरण साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान-केंद्रित नीतियां व्यावहारिक और दूरदर्शी हैं। डॉ. मोहन यादव सरकार ने मिशन ज्ञान के अंतर्गत किसानों को विशेष प्राथमिकता दी है। अप्रैल 2025 में कैबिनेट बैठक में मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन को मंजूरी दी जिसका मुख्य लक्ष्य किसानों की आय दोगुनी करना , जलवायु-अनुकूल और सतत कृषि को बढ़ावा देना जैविक खेती, पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण करना है। खेती का रकबा 2.50 लाख हेक्टेयर बढ़ाने, तीन नदी जोड़ो परियोजना से 16 लाख हेक्टेयर सिंचाई, माइक्रो इरीगेशन विस्तार, आधुनिक मंडियां, बीज परीक्षण लैब और फसल नुकसान सर्वे के लिए तहसील-स्तरीय मौसम केंद्र जैसी रोडमैप ने किसानों का मन मोह लिया है। भावांतर योजना का विस्तार कर सोयाबीन के बाद सरसों को शामिल किया गया, जबकि उड़द और मूंगफली पर समर्थन मूल्य के साथ बोनस दिए जाने की बड़ी घोषणा भी हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील हैं। किसानों के हितों में लिए जा रहे अनेक निर्णय न केवल किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, बल्कि प्रदेश सरकार की किसान कल्याण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का भी प्रतीक भी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव की भावांतर राशि की घोषणा से किसानों के चेहरे पर नई आशा, उत्साह और विश्वास का संचार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन से मध्यप्रदेश में कृषि विकास योजनाएं तेजी से लागू हो रही हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार योजनाओं की पहुँच परिवारों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। मध्यप्रदेश को देश का इकलौता राज्य है जहां किसानों को 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘स्वावलंबी गौशाला (कामधेनु) स्थापना नीति-2025’ लागू की है। इसके तहत 5,000 से अधिक गायों वाली बड़ी आत्मनिर्भर गौशालाएं स्थापित करने की योजना है। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली और भूसे की मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। पिछले डेढ़ वर्ष में प्रदेश में दूध संग्रहण भी काफी बढ़ चुका है। सरकार ने शासकीय गौशालाओं में प्रति गाय अनुदान राशि बढ़ाई है और पशुधन रखने वालों को प्रोत्साहन देने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की हैं। प्रदेश में अब तय वक्त पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी किये जाने पर सहमति बन चुकी है। उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराने वाले सभी किसानों का गेहूं खरीदा जायेगा। गेहूं उपार्जन में बारदान की उपलब्धता निरंतर बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास सरकार द्वारा किए जा रहे हैं। केन्द्र सरकार, जूट कमिश्नर सहित अन्य बारदान प्रदाय एजेंसियों से बारदान आपूर्ति के लिए राज्य सरकार लगातार सम्पर्क बनाए हुए है। कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को मिशन मोड में काम करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समग्र किसान कल्याण पर जोर दिया है। पशुपालन, मत्स्य विकास और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मोहन सरकार तेजी से अपने कदम बढ़ा रही है। वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन के लिए प्रदेश के 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में 10 अप्रैल से एवं अन्य सभी संभागों में 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं का उपार्जन प्रारंभ होने जा रहा है। गेहूं उपार्जन के लिए इस वर्ष प्रदेश में कुल 3627 उपार्जन केंद्र बनाये गये हैं। बीते उपार्जन वर्ष 2025-26 में 15 लाख 44 हजार 55 किसानों ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया था। इस उपार्जन वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,625 रूपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। राज्य सरकार प्रदेश के किसानों को गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 40 रूपए प्रति क्विंटल बोनस का लाभ भी इस वर्ष देने जा रही है। किसानों का जीवन संवारने और इनकी बेहतरी के लिए पूर्ण समर्पित भाव से मिशन मॉड में कृषि वर्ष का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश की सभी कृषि उपज मंडियों को वैश्विक वर्ल्ड क्लास मंडी की तर्ज पर अपग्रेड किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने स्पष्ट कहा कि किसानों की समृद्धि ही उनकी सरकार का एकमात्र उद्देश्य है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह दृष्टिकोण न केवल मध्यप्रदेश को कृषि प्रधान राज्य के रूप में स्थापित करेगा, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर देश के विकास में योगदान देगा। निश्चित ही मध्यप्रदेश के किसानों के लिए वर्ष 2026 किसान कल्याण की नई इबारत लिखने वाला साबित होगा। ( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं ) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 9 अप्रैल /2026