राष्ट्रीय
10-Apr-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। बदलते मौसम में बच्चों में पेट से जुड़ी समस्याएं, सर्दी-जुकाम और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता जैसी परेशानियां आम हो जाती हैं। ऐसे समय में प्राकृतिक उपाय अपनाकर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया जा सकता है। आयुर्वेद में कई ऐसे औषधीय उपाय बताए गए हैं, जिनमें जायफल को विशेष रूप से उपयोगी माना गया है। इसे वात-शामक, पाचक और मस्तिष्क को पोषण देने वाला बताया गया है, जो शरीर को संतुलित रखने में मदद करता है। जायफल का सेवन बच्चों के लिए सीधा नहीं किया जाता, क्योंकि इसकी प्रकृति तीक्ष्ण मानी जाती है। इसलिए पारंपरिक रूप से इसे विशेष प्रक्रिया के माध्यम से शुद्ध और कोमल बनाया जाता था। सबसे पहले जायफल को दूध में उबाला जाता है, फिर कुछ समय के लिए दही में रखा जाता है और अंत में घी में पकाया जाता है। इस संस्कार के बाद इसे फिर से दूध में घिसकर बहुत ही कम मात्रा में बच्चों को दिया जाता है। इस प्रक्रिया से जायफल की तीक्ष्णता कम हो जाती है और उसके औषधीय गुण संतुलित होकर शरीर के लिए अधिक सुरक्षित बन जाते हैं। नियमित और सीमित मात्रा में जायफल के सेवन से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार होता है और शरीर को मौसम के बदलाव के प्रति बेहतर तरीके से ढलने में मदद मिलती है। इससे पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस और अपच में राहत मिलती है। इसके अलावा यह बच्चों में बेचैनी को कम करने और नींद को बेहतर बनाने में भी सहायक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार यह तंत्रिका तंत्र को शांत कर मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। मौसमी बीमारियों जैसे सामान्य सर्दी और खांसी-जुकाम में भी जायफल का उपयोग लाभकारी माना गया है, लेकिन इसका उपयोग हमेशा सीमित मात्रा में और सही विधि से ही करना चाहिए। सुदामा/ईएमएस 10 अप्रैल 2026