अंतर्राष्ट्रीय
10-Apr-2026
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-पाकिस्तानी वैज्ञानिक ने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को हथियार बनाने की मदद की, केवल उत्तर कोरिया ही बना सका परमाणु शक्ति इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक अब्दुल कदीर खान ने एक समय में ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने की तकनीक देने की कोशिश की थी। हालांकि, एक भूल और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण ईरान अपने ‘इस्लामी बम’ के सपने को साकार नहीं कर सका। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, ए.क्यू. खान ने 1980 और 1990 के दशक में ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक और डिजाइन उपलब्ध कराने का प्रयास किया। उनका मानना था कि सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन के पास परमाणु होना उचित नहीं है, मुस्लिम दुनिया को भी यह ताकत मिलनी चाहिए। खान ने अपने अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क के तहत ईरान को 4,000 पुराने और पहली पीढ़ी के सेंट्रीफ्यूज और डिजाइन भेजे। पाकिस्तानी वैज्ञानिक ने 1970 के दशक में यूरोप के यूरेनियम फ्यूल उत्पादन केंद्रों से चुराए गए ब्लूप्रिंट का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान में रावलपिंडी में रिसर्च लैब बनाई और एनरिच्ड यूरेनियम तैयार किया। इसके बाद, 1998 में पाकिस्तान ने भारत के बाद बलूचिस्तान के रेगिस्तान में सफल परमाणु परीक्षण किया और दुनिया की सातवीं परमाणु शक्ति बन गया। ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति अकबर हाशेमी रफसंजानी ने बाद में बताया कि पाकिस्तान की मदद से ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब पहुंच गया था, लेकिन 2003 में पूरा ऑपरेशन खत्म कर दिया गया। लीबियाई नेता मुअम्मर गद्दाफी ने अमेरिका की सहमति में इस योजना का खुलासा किया। ए.क्यू. खान ने 2004 में स्वीकार किया कि उन्होंने ईरान, लीबिया और उत्तर कोरिया को परमाणु तकनीक दी थी। हालांकि, इनमें से केवल उत्तर कोरिया ही सफल होकर परमाणु शक्ति बन पाया। खान ने कहा कि मुस्लिम दुनिया के पास भी परमाणु हथियार होना चाहिए और उन्होंने इसके लिए प्रयास किए। इस खुलासे से पाकिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय परमाणु नेटवर्क और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर नई बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि ईरान तकनीकी रूप से सफल होता, तो मध्य पूर्व का सामरिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाता। हिदायत/ईएमएस 10 अप्रैल 2026