नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत ने हाल ही में अपनी कूटनीति को सक्रिय करते हुए कई देशों के साथ रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया हैं। इस कड़ी में सबसे बड़ी खबर यह है कि भारत और तुर्की ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने की कोशिश की है। नई दिल्ली में 8 अप्रैल को भारत और तुर्की के विदेश विभागों के बीच 12वें दौर की बैठक हुई, जिसमें भारत के वेस्ट सेक्रेटरी और तुर्की की डेपुटी मिनिस्टर बैरिस इकनकी मौजूद रहीं। बैठक में ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, टूरिज्म, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, एनर्जी, एजुकेशन और कल्चर में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। सिर्फ क्षेत्रीय सहयोग ही नहीं, बल्कि बैठक में लोगों के बीच कनेक्ट बढ़ाने और क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म के खिलाफ मिलकर काम करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही ग्लोबल और रीजनल मुद्दों पर आपसी दृष्टिकोण साझा किया। इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह सिर्फ बांग्लादेश या तुर्की तक सीमित नहीं है। भारत ने हाल ही में अज़रबाइजान के साथ भी द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने की दिशा में बातचीत की थी। छठे दौर की भारत-अज़रबाइजान फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन की बैठक बाकू में हुई थी, जिसमें दोनों देशों ने ट्रेड, टेक्नोलॉजी, टूरिज्म, फार्मास्युटिकल सेक्टर और क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म के खिलाफ सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। यह रणनीति साफ तौर पर पाकिस्तान के खिलाफ भारत की स्थिति को मजबूत करती है। पहले जिन देशों ने पाकिस्तान के समर्थन में कदम बढ़ाए थे, जैसे अज़रबाइजान और तुर्की, अब वही देश भारत के साथ अपने संबंधों को सुधारने और गहरा करने की कोशिश में लगे हैं। इसी तरह बांग्लादेश का नया विदेश मंत्री भी भारत के दौरे पर हैं, जो दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती प्रदान करेगा। भारत की यह डिप्लोमेसी केवल क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि ग्लोबल पैमाने पर भी प्रभाव डाल रही है। पाकिस्तान के सहयोगियों की स्थिति में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। चीन के अलावा, जो पाकिस्तान के समर्थन में रहा है, अब कई अन्य देश जैसे अज़रबाइजान, तुर्की, और बांग्लादेश भारत के साथ आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग में बढ़ोतरी करने के लिए सक्रिय हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की रणनीति प्रभावित हो रही है और भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत हो रहे हैं। आशीष/ईएमएस 10 अप्रैल 2026