राज्य
10-Apr-2026
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- चांदिवली विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम मशीनों की जांच का रास्ता साफ, हाईकोर्ट के आदेश पर होगी जांच मुंबई, (ईएमएस)। मुंबई के चांदिवली विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा चुनावी विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। दरअसल शिवसेना शिंदे गुट के विधायक दिलीप (मामा) लांडे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम मशीनों की जांच की तैयारी शुरू हो गई है। दरअसल, कांग्रेस के उम्मीदवार मोहम्मद आरिफ लल्लन खान उर्फ नसीम खान ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनाव के दौरान आचार संहिता का उल्लंघन हुआ और मतदाताओं पर अनुचित प्रभाव डाला गया। उनका कहना था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने चुनाव प्रचार के दौरान चांदिवली में रोड शो किया, जो नियमों के खिलाफ था। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सोमशेखर सुंदरसन के समक्ष हुई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस सबूत भी जरूरी होते हैं। इसी आधार पर अदालत ने नसीम खान की याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए चुनाव आयोग को दो महीने के भीतर संबंधित ईवीएम मशीनों की जांच करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब चुनाव आयोग द्वारा ईवीएम की जांच कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि यह जांच 16 और 17 अप्रैल को मुंबई में की जाएगी। इसके लिए ईवीएम बनाने वाली कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल), बेंगलुरु के विशेषज्ञों की टीम मौजूद रहेगी, जो मशीनों की ‘डायग्नोस्टिक चेक’ करेगी। उपनिर्वाचन अधिकारी द्वारा नसीम खान को भेजे गए पत्र में इस जांच की जानकारी दी गई है। इस प्रक्रिया में कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट मशीनों की ‘बर्न्ट मेमोरी’ यानी माइक्रो कंट्रोलर की भी जांच की जाएगी। नसीम खान ने इस आदेश को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत में पहली बार चुनाव के बाद उम्मीदवारों और अधिकारियों की मौजूदगी में ईवीएम की इस तरह जांच की जा रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2024 के फैसले का हवाला देते हुए बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र की 5 प्रतिशत ईवीएम मशीनों की तकनीकी जांच की व्यवस्था पहले ही तय की गई है। गौरतलब है कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में दिलीप लांडे ने चांदिवली सीट से नसीम खान को हराया था। चुनाव के बाद से ही विपक्षी दलों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। अब सभी की नजर इस जांच पर टिकी है। यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी या छेड़छाड़ सामने आती है, तो विधायक दिलीप लांडे की सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है। स्वेता/संतोष झा-१० अप्रैल/२०२६/ईएमएस