राष्ट्रीय
10-Apr-2026


लखनऊ (ईएमएस)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में संजय निषाद के सामने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोहरी चुनौती खड़ी होती दिख रही है। एक ओर ओम प्रकाश राजभर उनकी पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों और सीटों पर दावा ठोक रहे हैं, तो दूसरी ओर मुकेश सहनी निषाद (मल्लाह) वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी कर चुके हैं। इससे निषाद राजनीति में प्रतिस्पर्धा तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। मुकेश सहनी 11 अप्रैल को लखनऊ में निषाद समाज की बड़ी रैली करने जा रहे हैं, इस यूपी में उनके राजनीतिक अभियान की शुरुआत माना जा रहा है। सहनी की पार्टी का आरोप है कि राज्य सरकार ने निषाद समाज को आरक्षण देने का वादा तो किया, लेकिन उसे पूरा नहीं किया। इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर वे यूपी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। बिहार में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद सहनी अब यूपी में संभावनाएं तलाश रहे हैं। उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय करीब 6 प्रतिशत आबादी के साथ एक महत्वपूर्ण अतिपिछड़ा वर्ग है। यह समुदाय कश्यप, बिंद, मल्लाह, निषाद जैसी कई उपजातियों में बंटा हुआ है और पूर्वी व मध्य यूपी के लगभग 160 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखता है। ऐसे में इस वोट बैंक का बिखराव किसी भी दल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। अब तक संजय निषाद को मल्लाह समुदाय का प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है और उनका भाजपा के साथ गठबंधन भी है। हालांकि मंत्री बनने के बाद भी वे समुदाय को आरक्षण दिलाने में सफल नहीं हुए, जिससे समाज में नाराजगी देखी जा रही है। इसका असर 2024 के चुनाव में उनके बेटे की हार के रूप में भी सामने आया। दूसरी तरफ, अखिलेश यादव भी इस वोट बैंक को साधने में जुटे हैं। उन्होंने निषाद समाज से जुड़ी रुक्मिणी देवी को अहम जिम्मेदारी देकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। इससे मुकाबला और बहुकोणीय हो गया है। इसी बीच ओम प्रकाश राजभर ने अतरौलिया और शाहगंज जैसी सीटों पर दावा ठोककर संजय निषाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ये वे सीटें हैं जहां निषाद पार्टी का प्रभाव रहा है। ऐसे में सीट बंटवारे को लेकर भी तनाव की स्थिति बन सकती है। कुल मिलाकर, निषाद वोट बैंक पर बढ़ती दावेदारी, आरक्षण का मुद्दा और सहयोगी दलों के बीच सीटों की खींचतान—ये सभी कारक संजय निषाद के लिए “डबल टेंशन” की स्थिति पैदा कर रहे हैं। 2027 का चुनाव इस सामाजिक समीकरण के लिहाज से बेहद दिलचस्प होने वाला है। राजभर बनाम निषाद की जंग ओम प्रकाश राजभर के द्वारा एक के बाद एक सीट पर दावेदारी जताने के बाद एनडीए के भीतर सियासी संग्राम छिड़ सकता है. निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने राजभर के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गठबंधन में रहकर इस तरह की घोषणाएं करना सही नहीं है और राजभर को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए। संजय निषाद ने यह भी साफ किया कि उनसे इस बारे में कोई बातचीत नहीं हुई है। इसके बाद उन्हें सीटों की दावेदारी नहीं करनी चाहिए। वहीं, राजभर का कहना है कि उन्होंने निषाद से बात कर ली। इस तरह दोनों नेताओं के बयानों में यह टकराव साफ दिखाता है कि एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर स्थिति सहज नहीं है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह विवाद आने वाले चुनाव से पहले और भी बढ़ सकता है, क्योंकि पूर्वांचल में सीटों का बंटवारा सभी दलों के लिए बेहद अहम है। आशीष दुबे / 10 अप्रैल 2026