नई दिल्ली,(ईएमएस)। इतने सालों के बाद भी मलेरिया आज भी दुनिया की खतरनाक बीमारियों में शुमार है, और इसका पूरी तरह असरदार इलाज अभी तक नहीं मिला है। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस के कैमिस्ट्री विभाग की डॉ. प्रियंवदा सिंह और उनकी टीम बीते 10 साल से मलेरिया के लिए नई दवा बनाने में जुटी है। उनकी रिसर्च में कई इसतरह के नए कंपाउंड सामने आए हैं, जो मौजूदा दवाओं से बेहतर असर दिखा रहे हैं और भविष्य में मलेरिया के इलाज को पूरी तरह बदल सकते हैं। मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है जो मादा एनोफेलेस मच्छर के काटने से होती है। इसके कई प्रकार होते हैं, जिसमें प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम सबसे खतरनाक होता है। डॉ. प्रियंवदा ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल 28 करोड़ों से ज्यादा लोग मलेरिया बीमारी की चपेट में आते हैं और 6 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट यह दिखाता है कि मलेरिया आज भी एक गंभीर वैश्विक चुनौती बना हुआ है। डॉ. प्रियंवदा ने बताया कि आज के समय में मलेरिया के इलाज के लिए क्लोरोक्विन और आर्टेमिसिनिन आधारित दवाएं दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि यह दवाएं हर मरीज पर पूरी तरह असरदार नहीं होतीं हैं। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि मलेरिया के परजीवी धीरे-धीरे इन दवाओं के प्रति प्रतिरोधक होते जा रहे हैं। इसके बाद नई और ज्यादा प्रभावी दवाओं की जरूरत लगातार बढ़ रही है। बात दें कि मिरांडा हाउस की कैमिस्ट्री लैब में डॉ. प्रियंवदा और उनकी टीम मेडिसिनल कैमिस्ट्री के जरिए मलेरिया की नई दवा पर काम कर रही है। उनका लक्ष्य इसतरह “नोवेल हेटरोसाइक्लिक कंपाउंड” तैयार करना है, जो मलेरिया के परजीवी को पूरी तरह खत्म कर सके। डॉ. प्रियंवदा ने बताया कि पिछले 10 साल में टीम ने 200 से ज्यादा नए कंपाउंड तैयार किए हैं। इन सभी को लैब में ही बनाया, शुद्ध किया और उनकी जांच की गई। आशीष दुबे / 10 अप्रैल 2026