इस्लामाबाद,(ईएमएस)। तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कान को लेकर पाकिस्तान से जुड़ी संभावित भागीदारी और डिलीवरी समय में बदलाव को लेकर नई जानकारी सामने आई है। तुर्की की एयरोस्पेस कंपनी टूसा के सीईओ मेहमक देमिरोग्लू के अनुसार, कान फाइटर जेट की डिलीवरी अब दो साल पहले शुरू हो सकती है। पहले इसकी शुरुआती डिलीवरी 2030 तक मानी जा रही थी, लेकिन अब 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक किया गया है। कान फाइटर जेट अभी विकास और परीक्षण चरण में है। इसके चार से छह प्रोटोटाइप अगले दो वर्षों में गहन उड़ान परीक्षण से गुजरने वाले है। यह एक ट्विन-इंजन, स्टील्थ क्षमता वाला मल्टीरोल लड़ाकू विमान है, जिसकी अधिकतम गति लगभग मैक 1.8 और ऊंचाई क्षमता लगभग 55,000 फीट है। इसमें आधुनिक एईएसए रडार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताएं शामिल करने का दावा किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान परियोजना में लंबे समय से संभावित साझेदार के रूप में जुड़ा हुआ है। तुर्की और पाकिस्तान मिलकर विमान के संयुक्त उत्पादन की योजना पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें पाकिस्तान में एक उत्पादन सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है। बताया जा रहा है कि लगभग 200 पाकिस्तानी इंजीनियर इस प्रोजेक्ट से जुड़े विकास कार्यों में योगदान दे चुके हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान वायुसेना के पुराने लड़ाकू विमानों, खासकर एफ-16 बेड़े, को भविष्य में बदलना है। सैन्य विशेषज्ञ इस क्षेत्रीय हवाई शक्ति संतुलन के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं। कुछ विश्लेषणों में यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान इस विमान को भारत की वायु रक्षा प्रणालियों के मुकाबले एक रणनीतिक विकल्प के रूप में देख रहा है। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि कान अभी पूरी तरह से ऑपरेशनल (एफओसी) स्तर तक नहीं पहुंचा है और फिलहाल परीक्षण चरण में है। इसके बाद इसकी वास्तविक क्षमता, तकनीकी प्रदर्शन और डिलीवरी समयसीमा में भविष्य में बदलाव संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नई पीढ़ी के लड़ाकू विमान के बड़े पैमाने पर उत्पादन और युद्ध में उपयोग के लिए कई सालों की अतिरिक्त परीक्षण प्रक्रिया जरूरी होती है। भारत की बढ़ सकती है चिंता भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में कोई भी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान नहीं है। आने वाले दो-तीन वर्षों में भारत ने किसी दूसरे देश से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को खरीदने की कोई योजना भी नहीं बनाई है। रूसी Su-57 के भारत में निर्माण को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है। ऐसे में अगर पाकिस्तानी वायुसेना के पास पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान आता है, तो इससे हवाई युद्ध में भारत की ताकत कमजोर पड़ सकती है। आशीष दुबे / 11 अप्रैल 2026