राष्ट्रीय
11-Apr-2026


इंदौर,(ईएमएस)। इंदौर में “वंदे मातरम्” को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर जोर पकड़ रहा है। यह विवाद 8 अप्रैल को इंदौर नगर निगम के बजट सत्र के दौरान शुरू हुआ, जब आरोप लगा कि कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम वंदे मातरम गाए जाने के समय सदन में मौजूद नहीं थीं। इस पर भाजपा पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने टिप्पणी की, इसके जवाब में फौजिया ने कहा कि वंदे मातरम् गाना अनिवार्य नहीं है और यह व्यक्तिगत इच्छा का विषय है। इस बयान के बाद सभापति ने उन्हें सदन से बाहर किया, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने विवादित पोस्ट जारी किया। उन्होंने घोषणा की कि जो भी महिला फौजिया का “मुंह काला” करेगी, उस महिला को 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। इस बयान के सामने आने के बाद शहर का माहौल तनावपूर्ण हो गया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। इस बीच कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान का बयान भी विवाद का कारण बना। उन्होंने जबरन वंदे मातरम् गवाने का विरोध कर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिससे कांग्रेस के भीतर भी मतभेद उजागर हो गए। विवाद के बढ़ने पर भाजपा ने दोनों कांग्रेस पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रशासन और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। वहीं कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने रुबीना इकबाल के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भोपाल भेज दिया है। साथ ही कांग्रेस ने अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम् गाना अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल राजनीतिक माहौल को गर्माया है, बल्कि सामाजिक तनाव भी बढ़ा दिया है। प्रशासन के लिए स्थिति को संभालना अब एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। आशीष दुबे / 11 अप्रैल 2026