इस्लामाबाद,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। इस पूरे विवाद और वार्ता का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा है। युद्ध के बाद से ही इस सामरिक समुद्री मार्ग पर कड़ा पहरा है। राहत की बात यह रही कि वार्ता के बेनतीजा रहने के बावजूद शनिवार को इस मार्ग से कम से कम 16 जहाज गुजरे, जो युद्धविराम के बाद से अब तक का सबसे व्यस्त दिन दर्ज किया गया। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में किसी भी महत्वपूर्ण मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन सकी। हालांकि यह वार्ता द्विपक्षीय थी, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से पूरी दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हुई थीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन और यूएसएस माइकल मर्फी इस क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय हैं। इन युद्धपोतों को विशेष रूप से ईरानी समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने और मार्ग को सुरक्षित करने के अभियान में लगाया गया है। निगरानी संस्था मैरीन ट्रैफिक ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सुरक्षा घेरे में चीन, हांगकांग और लाइबेरिया के झंडे वाले तीन विशाल तेल टैंकरों को सफलतापूर्वक निकाला गया। दूसरी ओर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने संबोधन में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने जैसे संवेदनशील विषय पर किसी भी गहरे मतभेद का जिक्र नहीं किया। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इसका बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े संकट से कम नहीं है। इस गतिरोध को तोड़ने के लिए पाकिस्तान ने एक संयुक्त गश्त का प्रस्ताव भी पेश किया है। इस्लामाबाद में हुई इस सीधी बातचीत के दौरान पाकिस्तान ने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुचारू बनाने के लिए इस विवादित जलमार्ग में एक संयुक्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। पाकिस्तान की इस रूपरेखा का उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। अब देखना यह होगा कि क्या भविष्य में दोनों देश इस प्रस्ताव पर विचार करते हैं या तनाव की स्थिति बरकरार रहती है। वीरेंद्र/ईएमएस/12अप्रैल2026