लेख
13-Apr-2026
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आजकल नासिक के ज्योतिषी और तांत्रिक बाबा अशोक खेरात का चर्चा गर्म है और सोशल मीडिया पर उक्त बाबा के वीडियो ऐसे चल रहे हैं जैसे गुड मॉर्निंग के मैसेज। पिछले वर्षों में तरह तरह के चमत्कार दिखाने वाले और लोगों के कष्ट दूर करने वाले बाबाओं की बहुतायत हो गई है। बीच बीच में कई बाबाओं के फ्रॉड, रेप और हत्या जैसे संगीन मामलों में पकड़े जाने की खबरें भी आती रहती हैं जिनमें से कई जेल भी पहुंचा दिए गए हैं। वैसे तो सारी दुनिया में सभी धर्मों में धार्मिक गुरुओं के अलावा भी कुछ विचारक और उपदेशक मौजूद हैं लेकिन भारत में इनकी संख्या कुछ ज्यादा ही है। अन्य धर्मों की तरह हिन्दू धर्म में धार्मिक प्रशिक्षण एवं वर्गीकरण की परम्परा नहीं है इसलिए बिना किसी योग्यता के भी कोई वाकपटु व्यक्ति अपने चारों ओर भक्तों और अनुयायियों की भीड़ इकट्ठा कर सकता है। लोगों को अपनी महिमा से प्रभावित करने के लिये शिक्षित और विद्वान होना जरूरी नहीं बल्कि कुछ करामात और बाजीगरी दिखा देना काफी है। आजकल टेक्नोलॉजी के जरिये ये भी ज्यादा मुश्किल नहीं जैसा कि खरात के मामले में रिमोट कंट्रोल सांप का पता चला है। इसके अलावा अगर किसी को ज्योतिष का ज्ञान है तो उसकी प्रसिद्धि और अधिक तेजी से फैलती है। ज्योतिषी की भविष्यवाणी यदि सुखद हो तो सच करने और दुखद हो तो टालने के लिए कोई भी व्यक्ति महंगे उपाय अपनाने को तैयार हो जाता है। इस तरह फर्जी बाबा विभिन्न प्रकार के हथकंडे इस्तेमाल करके धर्मभीरु लोगों का विश्वास जीत लेते हैं। अपने देश में अनेक समुदायों, जातियों, वर्गों और सम्प्रदायों में विभक्त समाज बाबा बनने के ज्यादा और आसान अवसर प्रदान करता है। अनगिनत बाबाओं की भीड़ में से कभी कभी कोई कानून की पकड़ में भी आ जाते हैं और तब पता चलता है कि इनमें अधिकांश कम पढ़े लिखे, सामान्य सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से निकल कर अपना साम्राज्य स्थापित करते हैं। मगर सवाल ये है कि कई फर्जी बाबाओं के पकड़े जाने के बाद भी लोगों का भरोसा कम कम क्यों नहीं होता। आखिर क्या कारण है कि आम जनता ऐसे बनावटी बाबाओं के धोखे में फंस जाती है। । दरअसल जिस वजह से धर्म की इतनी लोकप्रियता है उसी वजह से ये बाबा भी सफल हो जाते हैं। आदिकाल से चली आ रही भय और लालच की भावनाएं ही मनुष्य को कमजोर बनाती हैं और वो किसी न किसी रूप में सहारा ढूंढता है। अधिकांश लोग तो मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर की शरण में चले जाते हैं लेकिन जब कुछ को वहां भी मनवांछित फल नहीं मिलता तो धर्म के एजेंट बने बाबाओं के चंगुल में फंस जाते हैं। दरअसल हमारे समाज और सिस्टम में फैली विसंगतियों और कठिनाइयों ने बरबस ही एक असंतुष्ट, अप्रसन्न और कुंठित जनमानस तैयार कर दिया है। हर तरफ भ्रष्टाचार, असमानता और अन्याय का बोलबाला है। बहुत छोटा अतिसमृद्ध वर्ग अपनी ताकत बढ़ाना चाहता है, महत्वाकांक्षा से पीड़ित मध्यवर्ग येन केन प्रकारेण आगे बढ़ने के लिये उतावला है और निम्न वर्ग अभाव, अवसरों की कमी और असमानता के बीच छटपटा रहा है। सभी लोग किसी न किसी तरह से परेशान और बेचैन हैं। आमदनी, सेहत, सामाजिक सद्भाव और भ्रष्टाचार जैसे पैमानों पर आधारित वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स पर भरोसा करें तो खुशी के इंडेक्स पर वर्ष 2025 में हम दुनिया में 116वीं पायदान पर है यानी जाहिर है कि कुल मिलाकर भारत एक खुशहाल देश नहीं है। यही फर्जी बाबाओं की बहुतायत का सबसे बड़ा कारण है। संक्षेप में कहा जाए तो समाज में फैले असमानता, असंतोष, अभाव और अवसरहीनता जैसे घटक ही ऐसे बाबाओं को पैदा कर रहे हैं और लोकप्रिय बना रहे हैं। अगर सामान्य नागरिक को एक अच्छी और सम्मानपूर्वक जिन्दगी उपलब्ध हो तो वह किसी बाबा-बैरागी के पास जाने की सोचेगा भी नहीं। समाज को शिक्षित करने और सिस्टम को सुधारने के अलावा धार्मिक कर्मकांड पर आधारित ऐसी धोखेबाजी और शोषण को खत्म करने का कोई उपाय नहीं। जब तक हम देश को एक खुशहाल देश बनाने की दिशा में ठोस प्रयास नहीं करेंगे, तब तक ऐसे फर्जी बाबा पैदा होते रहेंगे। (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 13 अप्रैल /2026