लेख
13-Apr-2026
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अभी बिहार के नालंदा के देवी मंदिर धर्मस्थल पर भगदड़ में नौ श्रद्धालुओं की मौत का मामला ठंडा भी नही हुआ कि उत्तर प्रदेश के बड़े तीर्थ स्थल मथुरा के निकट वृंदावन में नाव हादसे का बेहद दुखदायी हादसा सामने आया है, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई है और अभी कुछ लापता भी हैं। आए दिन कभी पवित्र नदियों के स्नान पर्व पर कभी मंदिरों में दर्शन अवसर पर तो कभी तीर्थ यात्रा और तीर्थ स्थलों कभी शोभा यात्रा पुरी रथयात्रा रामलीला मेलों या गणेश मूर्ति विसर्जन के मौके पर हो रहे हादसों में सैकड़ों श्रद्धालुओं की जान जा रही है हर हादसे के बाद जांच की खाना पूर्ति की जाती है हर बार प्रबंधन की खामियां प्रशासन की लापरवाही सामने आती है लेकिन कोई बदलाव नहीं आता इससे पहले अगला हादसा हो जाता है। आपको बता दें वृंदावन एक ऐसा तीर्थ स्थल है, जहां लाखों ही लोग जाते हैं। यहां भगवान कृष्ण जी ने अपना बचपन गुज़ारा। उनका जन्म मथुरा में हुआ। वृंदावन में सैकड़ों मंदिर हैं। यमुना के किनारे बसा होने के कारण यहां अनेक ही घाट हैं। यहां भगवान कृष्ण की याद में बना बांके बिहारी मंदिर लगातार बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र बना रहता है। पंजाब से भी कुछ दर्जन श्रद्धालु यहां गए थे और लुधियाना, मुक्तसर एवं जगराओं के लगभग 37 श्रद्धालु यमुना में एक मोटर बोट पर सवारी कर रहे थे। गहरे पानी में बने पाटून पुल जिसे अब हटाया जा रहा था, से श्रद्धालुओं की नाव टकरा गई, जिस कारण यह हादसा हो गया, परन्तु नज़दीक के नाव वालों और गोताखोरों ने इनमें से कई व्यक्तियों को बचा लिया। इससे पहले भी देश भर में ज्यादातर धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए पूरे प्रबन्ध न किये जाने के कारण अक्सर हादसे हो जाते हैं जिनमें बड़ी संख्या में लोग शिकार हो जाते हैं। इस तरह के प्रत्येक बड़े हादसे के बाद विशेष रूप से मेलों और धार्मिक स्थलों पर एकत्रित हुए श्रद्धालओं संबंधी पुख्ता प्रबन्ध करने की योजनाएं बनाई जाती हैं। इन प्रबन्धों का कुछ प्रभाव भी पड़ता है। फिर भी स्थानीय प्रशासन द्वारा इन प्रबन्धों में त्रुटियां रह जाने के कारण या प्रबन्धकों की लापरवाही के कारण ऐसे दुखद हादसे घटित हो जाते हैं। ऐसा कुछ न घटित हो, इसकी ज़िम्मेदारी संबंधित राज्यों पर भी आती है। उनकी यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे प्रत्येक पक्ष से सचेत होकर प्रबन्ध करें, जिनसे श्रद्धालुओं की बड़ी से बड़ी संख्या को भी नियंत्रित किया जा सके, ताकि ऐसे हादसे न घटित हों। यमुना नदी की सैर करते हुए अथवा यहां एक से दूसरे स्थान पर नावों द्वारा जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन को सचेत होने की ज़रूरत है। जिस समय यह हादसा घटित हुआ, उस समय मोटर बोट में 31 श्रद्धालु थे, जिनमें से किसी ने भी लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। यह बात सुनिश्चित है कि यदि मोटर बोट के प्रबन्धकों या प्रशासन की ओर से नाव में बैठने वालों के लिए लाइफ जैकेट पहनना ज़रूरी किया जाता तो मरने वालों में ज्यादातर का बचाव होने की बड़ी सम्भावना थी। इस संबंध में सरकार का भी यह कर्तव्य बनता है कि वह किसी भी धार्मिक या अन्य त्यौहार पर अथवा यदि किसी स्थान पर भारी जनसमूह जमा होने की सम्भावना हो, तो वह विशेष प्रबंध किए जाने के निर्देश दे और स्थानीय सरकारों द्वारा किए गए प्रबन्धों संबंधी भी केन्द्र सरकार से संबंधित अधिकारियों द्वारा सम्पर्क बनाए रखना ज़रूरी होना चाहिए। चाहे प्रधानमंत्री द्वारा और पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा भी प्रभावित परिवारों के लिए राहत की घोषणा की गई है परन्तु ऐसे हादसों के कारण लम्बी अवधि तक संबंधित परिवारों को बड़ी त्रासदी भोगनी पड़ती है। समाज के सभी वर्गों और प्रशासनों को यह सुनिश्चित बनाना चाहिए कि भविष्य में ऐसा कुछ घटित न हो वहीं श्रद्धालुओं को भी पर्याप्त सावधानी और उत्साह के अतिरेक से बचना चाहिए एक ही दिन एक ही अवसर पर क्षमता से अधिक लोगों का एक स्थान पर स्नान पूजा मेला कथा शोभायात्रा में जमावड़ा करना और संयम खो कर धक्का मुक्की कर व्यवस्था बिगाड़ना कौन सी धार्मिकता का परिचय देता है? हर आयोजन में दो चार फीसदी ऐसे उश्रृंख लोगों की मौजूदगी रहती है जो अनावश्यक टकराव और अराजकता फैलाने का काम करते हैं। ऐसे लोग न भक्त हो सकते हैं न श्रद्धालु ये सिर्फ धार्मिक चोला पहन कर उन्माद मचाने का काम करते हैं और सच्चे श्रद्धालुओं के जीवन के लिए खतरा पैदा करने का काम करते हैं ऐसे ही लोग कांवड़ियों के वेश में शामिल होकर की बार उपद्रव करने का प्रयास करते हैं।सभी श्रद्धालुओं का कर्तव्य है कि वह व्यवस्था बना रही पुलिस मंदिर कमेटी के स्वयं सेवकों के निर्देशानुसार संयमित व्यवहार करें आपाधापी लाइन तोड़ कर आगे बढने की स्वार्थी प्रवृति से बचना चाहिए वही धार्मिक उपदेशक कथा वाचक भी अपने अनुयायियों को इन अवसरों पर नैतिकता संयम बनाने के लिए आगाह कर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।कोई भी हादसा अनेक जीवन खासकर महिलाओं बच्चो के जीवन को खत्म कर परिवार को न भूलने वाला दुख देता है इस को टाला जा सकता है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 40 वर्षों से लगातार पत्रकारिता और लेखन से सम्बद्ध हैं) (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 13 अप्रैल /2026